वंदे मातरम को लेकर देश में सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। कांग्रेस ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि पार्टी अपने कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो पद ही गाएगी। कांग्रेस ने इसके लिए 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की ओर से लिए गए फैसले का हवाला दिया है। पार्टी का कहना है कि वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तय की गई परंपरा और उस समय के नेताओं के फैसले का पालन करेगी।
कांग्रेस का यह फैसला ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने वंदे मातरम के पूर्ण गान को आधिकारिक प्रोटोकॉल का हिस्सा बनाया है। इसी को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
1937 के फैसले को कांग्रेस ने दोहराया
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति ने तय किया था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो पद गाए जाएंगे। कांग्रेस ने अब एक बार फिर उसी फैसले को दोहराते हुए कहा है कि पार्टी अपने ऐतिहासिक निर्णय से पीछे नहीं हटेगी।
कांग्रेस नेता गुरदीप सिंह सप्पल ने कहा कि पार्टी उन नेताओं के बताए रास्ते पर चल रही है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया था। उन्होंने महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और मौलाना आजाद जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए पार्टी के फैसले का बचाव किया।
मणिशंकर अय्यर ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप
वंदे मातरम विवाद के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का पहले दो पद गाने का फैसला ऐतिहासिक संदर्भ में लिया गया था और पार्टी उसी पर कायम है।
अय्यर ने सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसके तहत वंदे मातरम के पूरे पाठ को आधिकारिक प्रोटोकॉल में शामिल किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे मुसलमानों के प्रति नफरत की सोच है।
अय्यर ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या किसी व्यक्ति के हिंदू या भारतीय होने के लिए उसका मुसलमानों के खिलाफ होना जरूरी है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है।
कांग्रेस नेताओं ने टैगोर की सलाह का भी किया जिक्र
मणिशंकर अय्यर ने दावा किया कि 1937 में वंदे मातरम के केवल पहले दो पदों को लेकर फैसला रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह के बाद किया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज भी उसी ऐतिहासिक निर्णय का सम्मान कर रही है।
कांग्रेस का तर्क है कि वंदे मातरम के शुरुआती दो पदों को लेकर स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में जो व्यवस्था बनी थी, उसे पार्टी की ऐतिहासिक परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए।
बीजेपी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
कांग्रेस के फैसले के बाद बीजेपी ने विपक्षी पार्टी पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के इस रुख को लेकर सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि पार्टी राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील मुद्दे को भी राजनीतिक विवाद में बदल रही है।
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कांग्रेस के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पार्टी पर निशाना साधा है। वहीं, बीजेपी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस के दो पद गाने के फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं।
शकील अहमद खान ने पुराने फैसले का किया समर्थन
बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने भी पार्टी के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यसमिति पार्टी की सबसे बड़ी और सम्मानित संस्था है। उनके मुताबिक, पार्टी को रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं के विचारों और फैसलों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जब इन नेताओं ने किसी विषय पर फैसला लिया था, तो पार्टी के लिए उस ऐतिहासिक निर्णय को महत्व देना जरूरी है।



