MPT Course: MPT और MOT डिग्री में अब अनिवार्य होगा स्पेशलाइजेशन

MPT Course: UGC के नए नियम लागू होने के बाद MPT और MOT छात्रों को विशेषज्ञता के आधार पर मिलेगी डिग्री, 2026-27 सत्र से होगा बदलाव

MPT Course: देश में हेल्थकेयर और एलाइड एजुकेशन को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने महत्वपूर्ण संशोधन किया है। नए नियमों के अनुसार मास्टर्स ऑफ फिजियोथेरेपी (MPT) और मास्टर्स ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (MOT) की डिग्री अब सामान्य रूप से जारी नहीं की जाएगी। इसके बजाय छात्रों को उनकी चुनी हुई विशेषज्ञता के आधार पर डिग्री प्रदान की जाएगी।

यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी। UGC ने इस बदलाव को भारत के राजपत्र में प्रकाशित पांचवें संशोधन के जरिए अधिसूचित किया है।

छात्रों को मिलेगी विशेषज्ञता की स्पष्ट पहचान

अब तक MPT और MOT की डिग्री एक समान नाम से दी जाती थी। हालांकि, नए नियम लागू होने के बाद डिग्री में संबंधित स्पेशलाइजेशन का उल्लेख होगा। इससे छात्रों की पेशेवर पहचान मजबूत होगी और रोजगार के अवसरों में भी मदद मिलेगी।

MPT में उपलब्ध होंगे कई विशेष क्षेत्र

फिजियोथेरेपी में मास्टर्स करने वाले छात्रों के लिए कई विशेषज्ञता क्षेत्र तय किए गए हैं। इनमें मस्कुलोस्केलेटल साइंस, न्यूरोसाइंस, स्पोर्ट्स साइंस, कार्डियोवैस्कुलर एवं पल्मोनरी साइंस, ऑन्कोलॉजी, पीडियाट्रिक्स तथा कम्युनिटी रिहैबिलिटेशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

UGC के अनुसार MPT कार्यक्रम की अवधि न्यूनतम दो वर्ष होगी। वहीं, प्रवेश के लिए संबंधित विषय में स्नातक डिग्री आवश्यक होगी।

MOT छात्रों को भी मिलेगा स्पेशलाइजेशन विकल्प

ऑक्यूपेशनल थेरेपी के छात्रों के लिए भी विशेषज्ञता आधारित व्यवस्था लागू की गई है। छात्र मानसिक स्वास्थ्य, न्यूरोसाइंस, जेरियाट्रिक्स, रिहैबिलिटेशन, हैंड साइंस, कार्डियो-पल्मोनरी साइंस और ऑन्कोलॉजिकल साइंस जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकेंगे।

MOT पाठ्यक्रम की न्यूनतम अवधि भी दो वर्ष तय की गई है।

पुराने बैचों के छात्रों को राहत

UGC ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल नए शैक्षणिक सत्र से प्रवेश लेने वाले छात्रों पर लागू होगा। जो विद्यार्थी पहले से MPT या MOT की पढ़ाई कर रहे हैं, उनकी डिग्री पुराने नियमों के अनुसार ही जारी की जाएगी।

कई नए हेल्थकेयर प्रोग्राम भी शामिल

इस संशोधन के तहत कई नए एलाइड और हेल्थकेयर कोर्स को भी डिग्री सूची में जोड़ा गया है। इनमें मेडिकल लेबोरेटरी साइंस, मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी, हेमेटोलॉजी एंड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नोलॉजी, एडवांस्ड केयर पैरामेडिक्स और एनेस्थीसिया एवं ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी जैसे कार्यक्रम शामिल हैं।

क्या है बदलाव का उद्देश्य?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस पहल का मकसद हेल्थकेयर शिक्षा में एकरूपता लाना और छात्रों को अधिक स्पष्ट शैक्षणिक पहचान देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय हेल्थकेयर शिक्षा प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में मदद मिलेगी और छात्रों के लिए करियर के नए अवसर भी खुलेंगे।

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