1980 की मतदाता सूची को लेकर उठा विवाद
विवाद का केंद्र 1980 की एक मतदाता सूची को बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता का दावा है कि उस समय सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में दर्ज था। इसी आधार पर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, इस संबंध में लगाए गए आरोपों पर अभी तक कोई न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।
कई वर्षों से चल रही इस कानूनी प्रक्रिया में अलग-अलग स्तर पर सुनवाई होती रही है। अब अदालत के ताजा आदेश ने इस पुराने विवाद को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
दिल्ली कोर्ट ने क्या फैसला दिया?
दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने 21 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया जिसमें एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
कोर्ट ने मामले को संबंधित मजिस्ट्रेट के पास वापस भेजते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड, दस्तावेजों और कानूनी दलीलों पर नए सिरे से विचार किया जाए। इसका अर्थ यह है कि अब निचली अदालत इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करेगी और आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
BJP ने कांग्रेस से मांगा स्पष्टीकरण
अदालत के आदेश के बाद बीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि मामले से जुड़े सवालों पर कांग्रेस को अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने राहुल गांधी से भी प्रतिक्रिया देने की मांग करते हुए कहा कि जनता के सामने तथ्यों को रखा जाना चाहिए। बीजेपी का कहना है कि अदालत के आदेश के बाद मामले से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शिता जरूरी है।
कांग्रेस की ओर से क्या कहा गया?
खबर लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से इस ताजा अदालती आदेश पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। हालांकि, पार्टी पहले भी इस तरह के आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बताती रही है।
आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर
अब यह मामला संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में दोबारा सुना जाएगा। वहां उपलब्ध दस्तावेजों, कानूनी तथ्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया जाएगा। अदालत की आगामी कार्यवाही के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में आगे कौन-से कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, कोर्ट के ताजा आदेश ने एक पुराने विवाद को फिर से राजनीतिक और कानूनी बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले की सुनवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी रहेगी।