West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट में EC का बड़ा दावा, ‘हार वाली सीटों की ही बात कर रही TMC’

West Bengal SIR: मतदाता सूची विवाद में आयोग ने पेश किए आंकड़े, लाखों अपीलें अब भी ट्रिब्यूनलों में लंबित।

West Bengal SIR: पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में चुनाव आयोग ने अदालत में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए कहा है कि लंबित अपीलों और हटाए गए मतदाताओं के आंकड़ों के आधार पर चुनाव परिणामों को प्रभावित बताना उचित नहीं है।

आयोग ने यह जवाब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद डेरेक ओब्रायन की याचिका पर दिया है। याचिका में दावा किया गया था कि कई विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या से कम था, इसलिए उन सीटों पर दोबारा चुनाव कराया जाना चाहिए।

आयोग ने TMC के तर्क पर उठाए सवाल

चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि याचिका में केवल उन सीटों का उल्लेख किया गया है जहां TMC को हार का सामना करना पड़ा। आयोग के अनुसार, ऐसी 21 सीटें भी हैं जहां तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि वहां हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी।

आयोग का कहना है कि यदि इसी तर्क को स्वीकार किया जाए, तो फिर उन सीटों पर भी सवाल उठेंगे जहां TMC विजयी रही थी।

लाखों अपीलें अभी भी लंबित

चुनाव आयोग ने बताया कि SIR प्रक्रिया से जुड़े मामलों में करीब 38 लाख से अधिक अपीलें दाखिल हुई थीं। इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की है जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे, जबकि कई अपीलें ऐसे नामों को शामिल किए जाने के खिलाफ भी दायर की गईं।

आयोग के मुताबिक, इन अपीलों का निपटारा अभी जारी है और बड़ी संख्या में मामले ट्रिब्यूनलों के समक्ष लंबित हैं।

हटाए गए नामों को लेकर क्या कहा?

आयोग ने कहा कि जिन नामों को मतदाता सूची से हटाया गया, उनमें बड़ी संख्या मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट या लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं की थी। आयोग का दावा है कि इसी कारण कुल हटाए गए नामों की तुलना में अपेक्षाकृत कम लोगों ने अपील दायर की।

साथ ही आयोग ने कहा कि हटाए गए प्रत्येक नाम को सीधे वैध मतदाता मान लेना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।

अपील ट्रिब्यूनल बढ़ाने की तैयारी

लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने के लिए चुनाव आयोग ने अपील ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। आयोग का मानना है कि इससे सुनवाई की प्रक्रिया तेज होगी और बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान हो सकेगा।

आयोग ने यह भी बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से पूर्व न्यायिक अधिकारियों को दूरस्थ रूप से भी सुनवाई की सुविधा दी जा सकती है।

दोबारा चुनाव की मांग पर संवैधानिक दलील

चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि किसी चुनाव परिणाम को चुनौती देने के लिए संविधान में अलग कानूनी व्यवस्था मौजूद है। आयोग के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार या पक्ष को किसी सीट के परिणाम पर आपत्ति है, तो उसके लिए चुनाव याचिका का रास्ता उपलब्ध है।

आयोग ने दलील दी कि सीधे बड़े पैमाने पर चुनाव रद्द करने या पुनर्मतदान की मांग संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

बंगाल की मतदाता सूची और SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहा विवाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। चुनाव आयोग और याचिकाकर्ताओं के तर्क सामने आने के बाद अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और उसके फैसले पर टिकी है।

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