Meerut: चर्चित हत्याकांडों में मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और रविता अब अपने परिवार से मुलाकात और आगे की कानूनी लड़ाई को लेकर चर्चा में हैं। मेरठ जिला जेल में बंद दोनों महिलाओं ने निजी अधिवक्ता उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके अलावा मुस्कान अपनी बड़ी बेटी पीहू से मिलना चाहती है, जबकि रविता ने अपने तीन बच्चों और पिता से मुलाकात की इच्छा जताई है।
दोनों महिलाओं को अलग-अलग हत्याकांडों में अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। फैसले के बाद अब उनकी ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाने की तैयारी की जा रही है। जेल प्रशासन के अनुसार, निजी वकील उपलब्ध कराने से संबंधित आवेदनों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़ी बेटी से मिलने के लिए मुस्कान कर रही इंतजार
सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर को मुस्कान और उसके साथी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद से मुस्कान अपनी बड़ी बेटी पीहू से मिलने की इच्छा जता रही है। बताया गया है कि वह पहले भी जेल प्रशासन से बेटी से मुलाकात कराने का अनुरोध कर चुकी है, लेकिन अभी तक उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी है।
मुस्कान की बड़ी बेटी पीहू अपने नाना-नानी के पास रह रही है, जबकि उसकी छोटी बेटी राधा फिलहाल मेरठ जिला जेल में उसके साथ है। जेल प्रशासन के मुताबिक, मुस्कान पिछले कई दिनों से बड़ी बेटी से मिलने की बात कह रही है। अब यह देखना होगा कि परिवार और जेल प्रशासन के बीच समन्वय के बाद मुलाकात कब संभव हो पाती है।
रविता को बच्चों और पिता से मिलने की उम्मीद
अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने 16 अक्टूबर को रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड सुनाया था। सजा सुनाए जाने के बाद रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल को लेकर अदालत के सामने चिंता जताई थी। अब उसने जेल प्रशासन से अपने बच्चों और पिता से मिलने की इच्छा व्यक्त की है।
रविता के लिए परिवार से मुलाकात की मांग ऐसे समय सामने आई है, जब उसे मृत्युदंड के फैसले के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया से गुजरना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रविता और अमरदीप को जेल में अलग-अलग बैरकों में रखा गया है। दोनों की निगरानी जेल प्रशासन की ओर से की जा रही है।
मृत्युदंड को चुनौती देने के लिए निजी वकील की मांग
मुस्कान और रविता ने अपने मामलों में निजी वकील उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा के अनुसार, दोनों के आवेदनों पर निजी अधिवक्ता मुहैया कराने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
मुस्कान और साहिल के साथ-साथ रविता और अमरदीप के पास भी निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने का कानूनी विकल्प है। ऐसे मामलों में अपील के जरिए दोषसिद्धि और सजा को चुनौती दी जा सकती है। आगे की सुनवाई में अदालत संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार करेगी।
फांसी की सजा के बाद तुरंत नहीं होती अंतिम कार्रवाई
निचली अदालत से मृत्युदंड मिलने का अर्थ यह नहीं है कि दोषियों को तुरंत फांसी दे दी जाएगी। मृत्युदंड के मामलों में हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषी पक्ष कानून के तहत अपील भी कर सकता है।
मामले की स्थिति और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार, आगे सुप्रीम कोर्ट में अपील तथा राज्यपाल या राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका जैसे विकल्प भी उपलब्ध हो सकते हैं। इसलिए मुस्कान, साहिल, रविता और अमरदीप से जुड़े मामलों में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण रहेगी।
फिलहाल मुस्कान अपनी बड़ी बेटी से मिलने की प्रतीक्षा कर रही है, जबकि रविता अपने बच्चों और पिता से मुलाकात चाहती है। दोनों की निजी वकील की मांग पर जेल प्रशासन की कार्रवाई और अदालत में आगे होने वाली कार्यवाही पर नजर रहेगी।



