Ashutosh Sinha: वाराणसी में सपा का दबदबा, आशुतोष सिन्हा ने लगातार दूसरी बार जीती MLC सीट

Ashutosh Sinha: बीजेपी के केदारनाथ सिंह को 17,211 वोटों से हराया, छात्र राजनीति से शुरू हुआ था आशुतोष सिन्हा का राजनीतिक सफर

Ashutosh Sinha:  उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष सिन्हा ने जीत हासिल की है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार केदारनाथ सिंह को 17,211 मतों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ आशुतोष सिन्हा लगातार दूसरी बार विधान परिषद सदस्य (MLC) निर्वाचित हुए हैं।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने छह, जबकि समाजवादी पार्टी ने पांच सीटों पर जीत दर्ज की। वाराणसी में समाजवादी पार्टी के लिए ये नतीजे खास रहे, क्योंकि पार्टी ने शिक्षक और स्नातक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में सफलता हासिल की। शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव और स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा ने जीत दर्ज की।

छात्र राजनीति से शुरू हुआ आशुतोष सिन्हा का सफर

आशुतोष सिन्हा ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वर्ष 2006 में वह हरिश्चंद्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष चुने गए। इस चुनाव में उन्हें रिकॉर्ड मत मिलने की बात कही जाती है, जिससे कॉलेज की राजनीति में उनकी पहचान बनी।

इसके अगले वर्ष, यानी 2007 में, उन्होंने छात्र युवा सम्मेलन आयोजित किया। इस कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। उस समय अखिलेश यादव सांसद होने के साथ पार्टी के राष्ट्रीय युवा प्रभारी भी थे।

छात्र राजनीति में सक्रियता के बाद आशुतोष सिन्हा ने समाजवादी पार्टी के साथ अपना राजनीतिक सफर आगे बढ़ाया और विभिन्न सामाजिक मुद्दों से जुड़े आंदोलनों में भाग लिया।

आंदोलनों में भागीदारी के दौरान हुई थी गिरफ्तारी

आशुतोष सिन्हा की राजनीतिक यात्रा में विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों का भी उल्लेख मिलता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के कारण वर्ष 2007 और 2011 में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

वर्ष 2007 के बलिया लोकसभा उपचुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया था। इसके बाद भी वह अधिवक्ताओं, शिक्षकों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों से जुड़े मुद्दों पर होने वाले प्रदर्शनों में हिस्सा लेते रहे।

अधिवक्ताओं की मांगों को लेकर भी रहे सक्रिय

आशुतोष सिन्हा अधिवक्ताओं से जुड़े कई मुद्दों पर आयोजित आंदोलनों में भाग लेते रहे हैं। इनमें युवा अधिवक्ताओं के लिए चैंबर उपलब्ध कराने, प्रोत्साहन राशि देने, वरिष्ठ अधिवक्ताओं को पेंशन का लाभ दिलाने और असमय मृत्यु होने पर उनके परिवारों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने जैसी मांगें शामिल थीं।

इसके अलावा वित्तविहीन शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, प्रेरकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर भी उन्होंने विभिन्न आंदोलनों में भागीदारी की। इन आंदोलनों में पुरानी पेंशन योजना की बहाली और सम्मानजनक मानदेय की मांग प्रमुख रही।

दिसंबर 2020 में पहली बार बने थे MLC

आशुतोष सिन्हा 7 दिसंबर 2020 को समाजवादी पार्टी के टिकट पर वाराणसी खंड निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे। अब दोबारा जीत हासिल करके उन्होंने विधान परिषद में लगातार दूसरा कार्यकाल सुनिश्चित किया है।

वर्ष 2023-24 के दौरान उन्होंने विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति के सभापति के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई थी। इस पद पर रहते हुए वह समिति से जुड़े संसदीय और सामाजिक सद्भाव संबंधी विषयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

वाराणसी में सपा की जीत से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी के चुनाव परिणामों पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर रहती है। इस बार शिक्षक और स्नातक दोनों विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की जीत ने क्षेत्रीय राजनीति में चर्चा बढ़ा दी है।

स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की जीत और शिक्षक सीट पर लाल बिहारी यादव की सफलता सपा के लिए महत्वपूर्ण रही। हालांकि, इन सीटों के परिणाम संबंधित शिक्षक और स्नातक मतदाताओं के मतदान पर आधारित हैं। इसलिए इन्हें पूरे वाराणसी के मतदाताओं की पसंद का पूर्ण प्रतिनिधि नहीं माना जा सकता।

लगातार दूसरी बार विधान परिषद पहुंचने वाले आशुतोष सिन्हा के सामने अब अपने निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठाने और मतदाताओं की अपेक्षाओं पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।

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