UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीति का संदेश दिया। लखनऊ में आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। अपने संबोधन में शाह ने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल का जिक्र करते हुए अयोध्या में 30 अक्टूबर 1990 को कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का मुद्दा उठाया।
अमित शाह ने कहा कि उस घटना को लेकर जनता समाजवादी पार्टी को माफ नहीं करेगी। उन्होंने अखिलेश यादव पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को अपनी पिछली सरकार के फैसलों का जवाब देना चाहिए। शाह के बयान को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति और सपा के खिलाफ उसके अभियान के संदर्भ में देखा जा रहा है।
मुलायम सिंह यादव का जिक्र कर अखिलेश पर हमला
बैठक में अमित शाह ने 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर हुई गोलीबारी का उल्लेख करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने इस घटना को समाजवादी पार्टी की राजनीति से जोड़ते हुए अखिलेश यादव पर हमला बोला।
शाह ने कहा कि जनता इस मुद्दे को भूली नहीं है और सपा को इसका राजनीतिक जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने तीसरी पीढ़ी तक माफी नहीं मिलने की बात कहकर पार्टी के खिलाफ अपनी टिप्पणी को और तीखा किया।
यह बयान भाजपा और सपा के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में आया है। अयोध्या से जुड़ा यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया आती है, यह आगे की राजनीतिक गतिविधियों में अहम रहेगा।
भाजपा को बताया बरगद का पेड़
अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठन और चुनावी प्रदर्शन का जिक्र करते हुए पार्टी को बरगद के पेड़ की तरह बताया। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि संगठन की जड़ें मजबूत हैं और चुनाव में जीत के लिए उन्हें पूरी ताकत के साथ काम करना चाहिए।
शाह ने कार्यकर्ताओं को आगामी चुनाव के मद्देनजर बूथ स्तर तक सक्रिय रहने और जनता के बीच सरकार के कामकाज को पहुंचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी को चुनाव में सफलता हासिल करने के लिए संगठनात्मक एकजुटता और लगातार जनसंपर्क पर ध्यान देना होगा।
2014, 2017 और 2022 के चुनावों का किया उल्लेख
अपने संबोधन में अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के पिछले चुनावी प्रदर्शन को भी याद किया। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का प्रभारी रहने का उल्लेख करते हुए पार्टी की उपलब्धियों की चर्चा की।
शाह के अनुसार, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 73 सीटें हासिल की थीं और उसे करीब 41 प्रतिशत वोट मिले थे। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए बताया कि भाजपा ने 312 सीटें जीती थीं और उसका मत प्रतिशत 40 प्रतिशत से अधिक रहा था।
उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में भी करीब 41 प्रतिशत वोट हासिल करने के बाद भाजपा की सरकार बनने का उल्लेख किया। शाह ने इन चुनावी आंकड़ों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को पार्टी के पिछले प्रदर्शन से प्रेरणा लेने और अगले चुनाव के लिए जुटने का संदेश दिया।
जातिवाद और परिवारवाद के बजाय कामकाज पर जोर
अमित शाह ने अपने भाषण में भाजपा की राजनीति को प्रदर्शन और विकास से जोड़कर पेश किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को जातिवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की राजनीति के बजाय सरकार के कामकाज और योजनाओं के आधार पर जनता के बीच जाना चाहिए।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताएं और जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में संगठन की भूमिका मजबूत करें।
शाह ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए गरीबी में कमी, सरकारी नौकरियों और निवेश से जुड़े आंकड़े भी रखे। उनके मुताबिक, देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में नौ लाख सरकारी नौकरियां देने और लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों से रोजगार के अवसर पैदा होने की बात कही।
इन आंकड़ों को अमित शाह के संबोधन में किए गए दावों के रूप में देखा जाना चाहिए। निवेश प्रस्तावों और उनसे वास्तव में पैदा हुई नौकरियों के बीच अंतर को समझने के लिए संबंधित सरकारी आंकड़ों की पुष्टि जरूरी है।
पुलिस भर्ती और मेट्रो परियोजनाओं का भी किया जिक्र
गृह मंत्री ने उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती और शहरी परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं का उल्लेख भी किया। उन्होंने राज्य में पुलिस विभाग में 2.26 लाख नौकरियों का जिक्र करते हुए इसे सरकार के कामकाज से जोड़ा।
इसके अलावा, शाह ने प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवा का उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन की बात कही।
भाजपा के लिए विकास परियोजनाएं और रोजगार से जुड़े मुद्दे आगामी विधानसभा चुनाव के प्रचार में अहम हो सकते हैं। हालांकि, भर्ती, निवेश और परियोजनाओं से संबंधित आंकड़ों का आकलन करते समय सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित योजनाओं की मौजूदा स्थिति देखना जरूरी है।
अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान देने की अपील
अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखने का संदेश दिया। उन्होंने अर्जुन के उदाहरण के जरिए कहा कि कार्यकर्ताओं को अपने उद्देश्य पर नजर रखते हुए लगातार मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने संगठन के नेताओं और कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर तैयारी करने, लोगों से संपर्क बढ़ाने और सरकार की योजनाओं की जानकारी जनता तक पहुंचाने का आह्वान किया। बैठक का उद्देश्य आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की तैयारियों की समीक्षा करना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना भी रहा।
2027 के चुनाव से पहले तेज होगी राजनीतिक बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मुकाबला तेज होने के संकेत हैं। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में अमित शाह ने जहां पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन और सरकार के कामकाज को सामने रखा, वहीं सपा पर हमला करते हुए अयोध्या गोलीकांड का मुद्दा उठाया।
उनके संबोधन में संगठन को मजबूत करने, विकास कार्यों को जनता तक पहुंचाने और चुनावी लक्ष्य के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने पर जोर रहा। आने वाले समय में दोनों दलों के नेताओं के बयान और चुनावी रणनीतियां प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रमों में शामिल रहेंगी।



