INDI Block Rally Delhi: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDI ब्लॉक की महारैली अब व्यापारियों के नुकसान को लेकर चर्चा में है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया है कि रैली के कारण राजधानी के व्यापार को करीब 11 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। संगठन के मुताबिक, रैली के आसपास के करीब 20 से 25 बड़े बाजार प्रभावित हुए और लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। CTI का कहना है कि इस दौरान कारोबार करीब 80 प्रतिशत तक ठप रहा। हालांकि, नुकसान के ये आंकड़े व्यापारिक संगठन की ओर से जारी किए गए हैं।
CTI ने रैली के आयोजन और उससे पैदा हुई व्यावसायिक परेशानियों पर नाराजगी जताई है। संगठन का कहना है कि रैली के कारण बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित हुई। इसका असर केवल दुकानदारों पर ही नहीं, बल्कि फैक्ट्री मालिकों, होटल-रेस्टोरेंट संचालकों, पर्यटन कारोबार और दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा।
रिटेल और थोक कारोबार को 8,800 करोड़ का नुकसान
CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, रैली के चलते दिल्ली के रिटेल और थोक व्यापार को करीब 8,800 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा हॉस्पिटैलिटी, होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन क्षेत्र में लगभग 500 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
संगठन ने अनौपचारिक क्षेत्र और दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े कामकाज में भी करीब 200 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया है। CTI का कहना है कि रैली के कारण दिल्ली के बाजारों में आने वाले ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट आई। संगठन के अनुसार, देश के करीब 100 शहरों और कस्बों से दिल्ली आने वाले 3 से 4 लाख संभावित ग्राहकों के बीच रैली के चलते अव्यवस्था और परेशानी की आशंका बनी रही, जिसके कारण उन्होंने बाजारों का रुख नहीं किया।
दिल्ली के 20 से 25 बड़े बाजार हुए प्रभावित
CTI के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास स्थित कई प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में कारोबार प्रभावित हुआ। इनमें कश्मीरी गेट, मोरी गेट, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, खारी बावली, नया बाजार, सदर बाजार, अजमेरी गेट, दरियागंज, पहाड़गंज, कमला मार्केट और जामा मस्जिद जैसे इलाके शामिल हैं।
इसके अलावा भागीरथ पैलेस, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, गफ्फार मार्केट और करोल बाग के कारोबार पर भी असर पड़ने का दावा किया गया है। CTI के मुताबिक, इन बाजारों में करीब तीन लाख दुकानें हैं, जिनमें से लगभग 2.5 लाख दुकानें बंद रहीं। संगठन का कहना है कि बाजारों में ग्राहकों की कमी और आवाजाही प्रभावित होने के कारण करीब 80 प्रतिशत कारोबार ठप रहा।
CTI ने राहुल गांधी को लिखे थे चार पत्र
रैली से पहले भी CTI ने इसके संभावित असर को लेकर चिंता जताई थी। संगठन की ओर से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर व्यापारियों की समस्याओं और बाजारों पर पड़ने वाले असर की जानकारी दी गई थी। CTI का दावा है कि उसने इस संबंध में कुल चार पत्र लिखे, लेकिन इसके बावजूद रैली का आयोजन किया गया।
संगठन ने सवाल उठाया है कि रैली के कारण व्यापारियों, दुकानदारों और फैक्ट्री मालिकों को हुए कथित भारी नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा। CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने नुकसान की भरपाई को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
दिहाड़ी मजदूरों पर भी पड़ा असर
CTI ने कहा कि बाजार बंद रहने और कारोबार प्रभावित होने का सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और दिहाड़ी मजदूरों पर पड़ा। ऐसे कामगारों की रोजाना की कमाई बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही पर निर्भर करती है। जब दुकानें बंद रहीं और व्यापार ठप हुआ तो उनकी आजीविका भी प्रभावित हुई।
फिलहाल 11 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का आंकड़ा CTI की ओर से लगाया गया अनुमान है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि से जुड़ा विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में इस दावे को व्यापारिक संगठन के आकलन के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। हालांकि, इस पूरे मामले ने राजनीतिक रैलियों के आयोजन के दौरान आम लोगों, कारोबारियों और स्थानीय बाजारों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।



