Dhruv Rathee: दिल्ली की साकेत कोर्ट ने यूट्यूबर ध्रुव राठी के खिलाफ साल 2018 के मानहानि मामले में जमानती वारंट जारी किया है। यह मामला उनके वीडियो ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विकास सांक्रित्यायन ने आरोप लगाया है कि ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में उनके खिलाफ कथित तौर पर झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाए थे। अदालत की इस कार्रवाई के बाद करीब आठ साल पुराने मामले ने एक बार फिर ध्यान खींचा है।
क्या है ध्रुव राठी से जुड़ा पूरा मामला?
यह मामला विकास सांक्रित्यायन की ओर से दायर मानहानि शिकायत से संबंधित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ध्रुव राठी ने अपने वीडियो ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट-2’ में उनके बारे में ऐसी बातें कही थीं, जिनसे उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर उन्होंने अदालत का रुख किया था।
हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है। ऐसे में मामले को आरोपों और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
नोटिस के बाद भी नहीं हो सकी कार्रवाई, अदालत ने जारी किया वारंट
मामले की सुनवाई कर रहे साकेत कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी राहुल जैन ने ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। अदालत में बताया गया कि ध्रुव राठी को नोटिस भेजा गया था, लेकिन जब नोटिस उनके पते पर पहुंचा तो वहां परिसर बंद मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले अदालत ने इसी सप्ताह ध्रुव राठी को नए सिरे से समन जारी किया था। इसके बावजूद समन पहुंचाने में आ रही परेशानी के बीच शिकायतकर्ता ने मामले की सुनवाई की तारीख पहले करने की मांग की थी।
शिकायतकर्ता ने क्यों मांगी जल्द सुनवाई?
शिकायतकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि ध्रुव राठी आमतौर पर विदेश में रहते हैं, जिसके कारण पिछले कई वर्षों से उन्हें समन पहुंचाने में देरी हो रही है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि उन्हें हरियाणा में ध्रुव राठी के आवास की जानकारी है।
इसके अलावा, शिकायतकर्ता ने अदालत को बताया कि ध्रुव राठी फिलहाल सीजेपी के प्रदर्शन के सिलसिले में भारत में मौजूद हैं। इसी आधार पर मामले में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी।
पहले इस मामले की सुनवाई 20 नवंबर को होनी थी। हालांकि, शिकायतकर्ता की ओर से तारीख पहले करने की मांग उठाए जाने के बाद अब मामले की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
क्या होता है जमानती वारंट?
जमानती वारंट अदालत की ओर से जारी किया जाने वाला ऐसा आदेश है, जिसमें निर्धारित कानूनी शर्तों के तहत जमानत मिलने का प्रावधान होता है। इसका उद्देश्य संबंधित व्यक्ति की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित करना होता है।
ध्रुव राठी के मामले में जमानती वारंट जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि मानहानि के आरोप साबित हो गए हैं। आरोपों की सत्यता और मामले के गुण-दोष पर फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।
फिलहाल, इस पुराने मानहानि मामले में साकेत कोर्ट की अगली सुनवाई 31 अक्टूबर को होनी है। अब देखना होगा कि अगली तारीख पर मामले में क्या कार्रवाई होती है।



