Punjab Election 2027: पंजाब में फरवरी 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और इससे पहले प्रदेश की सियासत में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक दल जहां चुनावी तैयारियों में जुटे हैं, वहीं कुछ ऐसे चेहरे भी चर्चा में हैं, जिनका अतीत आपराधिक मामलों से जुड़ा रहा है। इनमें 2016 के चर्चित नाभा जेल ब्रेक कांड के आरोपी गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम भी सामने आ रहा है।
बताया जा रहा है कि जेल से बाहर आने के बाद सेखों ने समाजसेवा के जरिए अपनी सार्वजनिक छवि को बदलने की कोशिश की है। अब उनके सक्रिय राजनीति में उतरने और किसी राजनीतिक दल का दामन थामने की चर्चा है। अगर ऐसा होता है तो पंजाब की राजनीति में अपराध और सियासत के रिश्ते को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो सकती है।
कौन हैं गुरप्रीत सिंह सेखों?
गुरप्रीत सिंह सेखों का नाम वर्ष 2016 के नाभा जेल ब्रेक मामले से जुड़ा रहा है। यह मामला पंजाब में काफी चर्चित रहा था। जेल ब्रेक की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और अपराधी नेटवर्क को लेकर कई सवाल उठे थे।
अब जेल से बाहर आने के बाद सेखों कथित तौर पर सामाजिक गतिविधियों के जरिए अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनके परिवार के दो सदस्य फिरोजपुर जिले में जिला परिषद का चुनाव भी जीत चुके हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि परिवार के स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को आगे बढ़ाते हुए सेखों खुद भी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।
पंजाब में अपराध और राजनीति का कनेक्शन नया नहीं
पंजाब की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले चेहरों की मौजूदगी कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसे नाम चुनावी राजनीति में उतर चुके हैं या राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे हैं।
लक्खा सिधाना इसका एक चर्चित उदाहरण हैं। पूर्व कबड्डी खिलाड़ी रहे सिधाना का नाम अतीत में कई आपराधिक मामलों से जोड़ा गया। बाद में उन्होंने खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और किसान आंदोलन से जुड़े चेहरे के तौर पर स्थापित किया। वर्ष 2022 में उन्होंने मौर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और दूसरे स्थान पर रहे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर बठिंडा से चुनाव लड़ा।
जयपाल भुल्लर के परिवार ने भी आजमाई सियासत
गैंगस्टर जयपाल भुल्लर की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उनके परिवार की राजनीतिक सक्रियता भी चर्चा में रही। उनके पिता और पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर भूपिंदर सिंह भुल्लर ने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के टिकट पर फिरोजपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।
इसी तरह बठिंडा क्षेत्र में कुलबीर नरुआना का नाम भी आपराधिक मामलों के कारण चर्चा में रहा। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने स्थानीय स्तर पर अपना प्रभाव बढ़ाया और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे।
रॉकी फाजिल्का भी लड़ चुके हैं विधानसभा चुनाव
पंजाब में अपराध और राजनीति के रिश्ते का एक पुराना उदाहरण जसविंदर सिंह उर्फ रॉकी फाजिल्का का भी है। उन्होंने वर्ष 2012 में फाजिल्का विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।
रॉकी फाजिल्का को करीब 39 हजार वोट मिले थे और उन्होंने भाजपा नेता सुरजीत कुमार ज्याणी को कड़ी टक्कर दी थी। हालांकि वह करीब 1,600 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने अकाली दल के नेता शेर सिंह घुबाया के लिए काम किया।
2027 के चुनाव में क्या पड़ेगा असर?
गुरप्रीत सिंह सेखों की संभावित राजनीतिक एंट्री ऐसे समय में चर्चा में है जब पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने वाली हैं। ऐसे में अगर वह किसी राजनीतिक दल के साथ औपचारिक रूप से जुड़ते हैं या चुनाव लड़ते हैं, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता उनके अतीत और वर्तमान राजनीतिक भूमिका को किस तरह देखती है।
पंजाब में लंबे समय से गैंगस्टर कल्चर, युवाओं पर उसके प्रभाव और अपराधियों की राजनीतिक पहुंच को लेकर बहस होती रही है। ऐसे में आपराधिक मामलों में नाम सामने आ चुके चेहरों का चुनावी राजनीति में आना राजनीतिक दलों के लिए भी एक चुनौती बन सकता है।
हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आरोप और अदालत से सिद्ध अपराध में अंतर होता है। इसलिए चुनावी राजनीति में किसी भी उम्मीदवार के अतीत का आकलन उसके खिलाफ मामलों की कानूनी स्थिति और न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना जरूरी है।
फिलहाल गुरप्रीत सिंह सेखों की राजनीतिक एंट्री को लेकर अंतिम तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन अगर वह चुनावी मैदान में उतरते हैं, तो पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में यह मुद्दा निश्चित तौर पर राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है।



