Piyush Goyal Japan Visit: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापान दौरे के दौरान भारत के कारोबारी माहौल की तारीफ करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा है। टोक्यो में जापानी कारोबारियों और निवेशकों को संबोधित करते हुए गोयल ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि भारत में सफल उद्यमियों को इस बात का डर नहीं रहता कि वे एक दिन अचानक गायब हो जाएंगे और फिर किसी दूसरे देश की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के तौर पर नजर आएंगे। उनके इस बयान को चीन के अरबपति कारोबारी और अलीबाबा के संस्थापक जैक मा से जोड़कर देखा जा रहा है।
पीयूष गोयल इन दिनों जापान की चार दिवसीय यात्रा पर हैं और उनके साथ 200 से ज्यादा भारतीय कारोबारी प्रतिनिधियों का दल भी गया है। यात्रा का प्रमुख उद्देश्य जापान से भारत में निवेश बढ़ाना और दोनों देशों के बीच कारोबारी रिश्तों को और मजबूत करना है। जापानी निवेशकों के सामने भारत को एक भरोसेमंद और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में पेश करते हुए गोयल ने कहा कि भारत में उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाता है और सफल कारोबारियों के लिए कारोबारी माहौल सुरक्षित है।
गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि अगर कोई कारोबारी भारत में सफल होता है या पैसा कमाता है तो उसे इस बात की चिंता करने की जरूरत नहीं है कि वह किसी दिन अचानक गायब हो जाएगा। उन्होंने इसी संदर्भ में यह भी कहा कि बाद में वही कारोबारी किसी जापानी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के रूप में दिखाई दे, ऐसा जोखिम भारत में नहीं है। हालांकि, केंद्रीय मंत्री ने अपने भाषण में न तो चीन का नाम लिया और न ही जैक मा का नाम सीधे तौर पर लिया, लेकिन उनके बयान को जैक मा के अनुभव से जोड़कर देखा गया।
दरअसल, जैक मा अक्टूबर 2020 में चीनी वित्तीय नियामकों की आलोचना करने के बाद लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन से दूर हो गए थे। उनके भाषण के कुछ ही समय बाद उनकी कंपनी एंट ग्रुप के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को रोक दिया गया था। यह आईपीओ उस समय दुनिया के सबसे बड़े आईपीओ में से एक बनने की उम्मीद थी। इसके बाद चीन में टेक कंपनियों और बड़े कारोबारी समूहों पर नियामकीय कार्रवाई भी तेज हुई थी।
जैक मा कई वर्षों तक सार्वजनिक नजरों से दूर रहे। बाद के वर्षों में उनकी जापान में मौजूदगी की खबरें सामने आईं और 2023 में वह टोक्यो यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर नजर आए। इसी वजह से पीयूष गोयल के ‘गायब होने’ और बाद में जापानी यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने वाले कारोबारी के बयान को जैक मा की कहानी की ओर संकेत माना जा रहा है।
पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों को भारत में निवेश के फायदे गिनाते हुए कहा कि भारत सिर्फ चीन के विकल्प के तौर पर ‘प्लस वन’ देश नहीं है। उनके मुताबिक भारत के पास मजबूत घरेलू बाजार, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, कुशल मानव संसाधन और वैश्विक कंपनियों के लिए बढ़ते कारोबारी अवसर हैं। उन्होंने कहा कि भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग के वैकल्पिक केंद्र के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यहां कंपनियों के लिए बड़े बाजार और लंबे समय के विकास की संभावनाएं भी मौजूद हैं।
गोयल ने बौद्धिक संपदा और डेटा सुरक्षा को लेकर भी जापानी निवेशकों को भरोसा दिलाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि भारत में कंपनियों के डेटा और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी का सम्मान किया जाता है। उनका संदेश साफ था कि जापानी कंपनियां भारत में निवेश करते समय अपने कारोबार, तकनीक और बौद्धिक संपदा को लेकर भरोसा रख सकती हैं।
भारत इस समय सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। वैश्विक स्तर पर कंपनियां अपनी सप्लाई चेन में विविधता लाने और चीन पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे समय में भारत खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग और निवेश केंद्र के रूप में पेश कर रहा है।
जापान भारत के प्रमुख निवेश साझेदारों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2000 से 2026 के बीच जापानी कंपनियों ने भारत में करीब 48.14 अरब डॉलर का निवेश किया है। दोनों देश आने वाले वर्षों में निवेश और आर्थिक सहयोग को और बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। जापान ने अगले दशक में भारत में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य भी रखा है।
पीयूष गोयल की जापान यात्रा इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। भारत जापानी कंपनियों से खास तौर पर हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में निवेश चाहता है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने की कोशिश भी जारी है।
गोयल का जैक मा की ओर इशारा करने वाला बयान ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक कंपनियों को चीन से अलग अपनी सप्लाई चेन तैयार करने के लिए आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में उनके बयान को सिर्फ राजनीतिक तंज नहीं, बल्कि जापानी निवेशकों के सामने भारत के कारोबारी मॉडल और निवेश माहौल को मजबूत तरीके से पेश करने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा सकता है। भारत का संदेश स्पष्ट है कि वह वैश्विक कंपनियों के लिए सुरक्षित, बड़ा और लंबे समय के विकास वाला बाजार बनना चाहता है।



