BRICS Summit: नई दिल्ली में चल रहे BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि अपने नाम की है। लंबे दौर की चर्चाओं और कई स्तरों पर हुई बैठकों के बाद सदस्य देश साझा घोषणा पत्र पर सहमत हो गए हैं। यह दस्तावेज समूह के प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सामूहिक रुख को सामने रखेगा।
सहमति तक पहुंचना आसान नहीं था
BRICS समूह में शामिल देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मामलों पर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक सुरक्षा जैसे विषयों पर कई दौर की चर्चा हुई। इन मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद सदस्य देशों ने साझा भाषा तैयार करने में सफलता हासिल की।
भारत ने संभाली मध्यस्थ की भूमिका
सम्मेलन की मेजबानी कर रहा भारत पूरे संवाद का केंद्र बना रहा। विभिन्न देशों की चिंताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए भारतीय पक्ष ने लगातार बातचीत जारी रखी। इसी प्रयास का परिणाम रहा कि सभी सदस्य एक साझा दस्तावेज पर सहमत हो सके।
नए सदस्य देशों के कारण बढ़ी चुनौती
BRICS के विस्तार के बाद समूह में कई नए देश शामिल हुए हैं। इनमें ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश भी हैं, जिनके क्षेत्रीय हित कई मामलों में अलग-अलग रहे हैं। ऐसे माहौल में सभी पक्षों को एक मंच पर लाकर सहमति बनाना आसान नहीं माना जा रहा था।
वैश्विक मंच पर बढ़ी भारत की साख
राजनयिक हलकों में इस सहमति को भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने विभिन्न देशों के बीच संवाद को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया और समूह की एकजुटता बनाए रखने में अहम योगदान दिया।
BRICS के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
संयुक्त घोषणा पत्र किसी भी बहुपक्षीय सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। यह सदस्य देशों की साझा प्राथमिकताओं और भविष्य की दिशा को दर्शाता है। ऐसे में इस पर सहमति बनना BRICS की मजबूती और आपसी सहयोग का संकेत माना जा रहा है।
फिलहाल सभी की नजरें उस संयुक्त घोषणा पत्र पर टिकी हैं, जिसे जल्द सार्वजनिक किया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसमें आर्थिक सहयोग, वैश्विक शासन सुधार, व्यापार, सुरक्षा और विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदु शामिल होंगे।



