BRICS: भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणा पत्र पर सदस्य देशों के बीच बनी सहमति को लेकर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने प्रतिक्रिया दी है। मायावती ने 140 पैराग्राफ वाले दिल्ली घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने को आपसी समझ-बूझ और कूटनीतिक सफलता बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच BRICS देशों का साझा दस्तावेज पर सहमत होना महत्वपूर्ण है।
मायावती ने यह भी कहा कि BRICS देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की इच्छा उम्मीद पैदा करती है। उन्होंने समूह के स्तर पर साझा मुद्रा विकसित करने के विचार को भी महत्वपूर्ण कदम बताया।
फिलिस्तीन और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के रुख का समर्थन
मायावती ने BRICS घोषणा पत्र में फिलिस्तीन के मुद्दे और आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के समाधान और 1966 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलिस्तीन के समर्थन के साथ आतंकवाद से हर स्तर पर मुकाबला करने की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि पहलगाम का जिक्र करते हुए आतंकवाद के खिलाफ दिखाई गई एकजुटता से भारत के दृष्टिकोण को समर्थन मिला है। मायावती ने इसे भारत के लिए सराहनीय पहल बताया।
उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब BRICS सम्मेलन में वैश्विक संघर्षों, आतंकवाद और आर्थिक अस्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुखता से चर्चा में हैं। यूक्रेन और ईरान से जुड़े संघर्षों के साथ-साथ व्यापार और टैरिफ को लेकर जारी तनाव भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल रहा है।
चीन के साथ रिश्तों को लेकर मायावती ने दी सलाह
BRICS घोषणा पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए मायावती ने भारत और चीन के संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच मतभेदों को विवाद में बदलने से बचना चाहिए और दोनों देशों को एक-दूसरे को विकास के साझेदार के तौर पर देखना चाहिए।
मायावती ने भारत-चीन सीमा विवाद को जल्द सुलझाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक, सीमा का मुद्दा जितनी जल्दी हल हो, दोनों देशों के लिए उतना ही बेहतर होगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मतभेदों को कम करने और विकास में साझेदारी की दिशा में उठाए गए कदम कितने प्रभावी साबित होते हैं।
BRICS में आर्थिक सहयोग पर भी जोर
मायावती ने BRICS देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने की इच्छा को सकारात्मक संकेत बताया। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ना उम्मीद जगाता है।
BRICS के विस्तार के बाद समूह में अलग-अलग क्षेत्रों की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल हुई हैं। ऐसे में व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और विकास के मुद्दों पर सामूहिक रणनीति को लेकर समूह की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
मायावती ने इसी संदर्भ में BRICS करेंसी के विकास के विचार को भी एक संभावित महत्वपूर्ण कदम बताया। हालांकि, साझा मुद्रा का विचार लंबे समय से चर्चा में रहा है और इसे लेकर सदस्य देशों के बीच आगे की प्रक्रिया और सहमति महत्वपूर्ण होगी।
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आज BRICS शिखर सम्मेलन का आखिरी दिन
भारत की मेजबानी में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आज दूसरा और अंतिम दिन है। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में BRICS नेताओं ने राउंडटेबल बैठक में हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, शांति, सुरक्षा, आतंकवाद और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन से इतर कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कर रहे हैं। इनमें कजाखस्तान, मिस्र, युगांडा और बुरुंडी समेत कई देशों के नेताओं के साथ मुलाकात शामिल है।
BRICS सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणा पत्र पर बनी सर्वसम्मति को भारत की कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, मायावती ने भी इस सहमति को सकारात्मक बताते हुए आर्थिक सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख और भारत-चीन संबंधों को लेकर अपनी राय सामने रखी है।



