नई दिल्ली में मंगलवार को हुई कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग और मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पारदर्शिता जरूरी है और हर मतदाता को अपने मताधिकार की सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए।
खरगे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की चिंताएं सामने रखीं। कांग्रेस ने इसी मुद्दे पर सरकार और चुनाव व्यवस्था के सामने पांच प्रमुख मांगें भी रखी हैं।
खरगे ने क्या कहा?
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका कमजोर हुई है और मतदाता सूची में लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए और उनके पद पर बने रहने पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस की ओर से इससे पहले भी CEC के इस्तीफे की मांग की जा चुकी है।
खरगे ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी तरह के बदलाव की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव सिर्फ सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा विषय है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में ‘नोटबंदी’ और ‘वोटबंदी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार पर राजनीतिक हमला भी किया। हालांकि, ये कांग्रेस अध्यक्ष की राजनीतिक टिप्पणियां हैं और इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
कांग्रेस की पांच प्रमुख मांगें क्या हैं?
CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं। इनमें सबसे पहली मांग मतदाता सूची में होने वाले बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करने की है।
दूसरी मांग है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जाए और उन्हें अपील करने का पर्याप्त अवसर मिले।
तीसरी मांग राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे जुड़े जरूरी डेटा को समय पर तथा आसानी से इस्तेमाल किए जा सकने वाले फॉर्मेट में उपलब्ध कराने की है।
चौथी मांग उन क्षेत्रों में स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की है, जहां मतदाता सूची में गंभीर विसंगतियों के प्रमाण सामने आए हैं।
पांचवीं मांग चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में अधिक पारदर्शिता की है, ताकि किसी भी पक्ष को जानकारी छिपाए जाने की आशंका न रहे। कांग्रेस का कहना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं का भरोसा मजबूत होगा।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर पिछले कुछ समय से विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और नियमों में बदलाव को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। आयोग का कहना है कि उसके फैसले निर्धारित कानूनी और सांविधिक प्रक्रियाओं के तहत लिए जाते हैं। आयोग ने आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच भी कहा है कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय सामने आना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR से जुड़े फैसले नियमों के अनुरूप लिए गए हैं।
CEC को लेकर कांग्रेस की मांग
CWC बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी दोहराई। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाने की बात कही है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी राजनीतिक मांग रखी है। खरगे ने चुनाव प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग की। यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है, जबकि सरकार और भाजपा की ओर से चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया जाता रहा है।
मतदाता को लेकर कांग्रेस का संदेश
खरगे ने कहा कि चुनावी राजनीति में सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान स्थायी महत्व रखते हैं। उन्होंने मतदाताओं के भरोसे को चुनाव प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें किसी भी नागरिक को अपने नाम के हटने या जुड़ने को लेकर अनिश्चितता न रहे और शिकायत की स्थिति में उसे उचित अपील का अधिकार मिले।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जाने वाला काम बता रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग की प्रक्रिया, विपक्ष के आरोप और दोनों पक्षों की ओर से सामने रखे गए दस्तावेज आने वाले दिनों में इस विवाद के केंद्र में रहेंगे।
फिलहाल CWC की बैठक के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। पार्टी की पांच मांगों में मतदाता सूची में पारदर्शिता, हटाए गए नामों पर अपील का अधिकार, राजनीतिक दलों को डेटा उपलब्ध कराना, गंभीर मामलों की स्वतंत्र जांच और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता शामिल है।



