India US Relations: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलती वैश्विक कूटनीति के बीच भारत की विदेश नीति और अमेरिका के मौजूदा रुख पर अहम टिप्पणी की है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंध अब किसी एक देश या शक्ति-केंद्र के इर्द-गिर्द सीमित नहीं रह गए हैं। देश अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग शक्तियों और क्षेत्रों के साथ संबंध आगे बढ़ा रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि जिस तरह की रणनीतिक स्वतंत्रता को लेकर पहले भारत से सवाल किए जाते थे, उसी तरह का व्यवहार अब अमेरिका भी कर रहा है। उनके मुताबिक वॉशिंगटन एक साथ चीन, रूस, यूक्रेन, यूरोप और एशिया के अन्य हिस्सों के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
पुरानी कूटनीतिक सोच में आया बदलाव
जयशंकर ने अपने संबोधन के दौरान उस दौर का उल्लेख किया जब अमेरिका में यह धारणा थी कि भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय विकल्प सीमित रखने चाहिए और वॉशिंगटन के साथ संबंधों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
विदेश मंत्री के मुताबिक, वैश्विक परिस्थितियां अब काफी बदल चुकी हैं। आज देश किसी एक साझेदार के साथ संबंधों को अपनी पूरी विदेश नीति का आधार बनाने के बजाय विभिन्न देशों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं।
अमेरिका के रुख का दिया उदाहरण
जयशंकर ने अमेरिका की वर्तमान विदेश नीति का हवाला देते हुए कहा कि वॉशिंगटन अब कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय है। चीन से लेकर रूस, यूक्रेन, यूरोप और एशिया के दूसरे देशों तक अमेरिका अलग-अलग स्तरों पर संपर्क और सहयोग बनाए हुए है।
उन्होंने इसी बदलाव को वैश्विक व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन से जोड़ा। उनके मुताबिक दुनिया अब ऐसी दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां बहुध्रुवीयता को नजरअंदाज करना मुश्किल है।
भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का संदर्भ
विदेश मंत्री की टिप्पणी का एक प्रमुख पहलू रणनीतिक स्वायत्तता रहा। इसका अर्थ यह है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने की गुंजाइश बनाए रखता है।
जयशंकर ने पहले भी कहा है कि बदलती दुनिया में भारत को विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के साथ अपने संबंधों को अपने हितों के अनुरूप संतुलित करना होगा।
व्यापार वार्ता पर भी बोले जयशंकर
न्यूयॉर्क में हुई चर्चा के दौरान भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों का मुद्दा भी सामने आया। जयशंकर ने दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता को जटिल बताया और अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं का उल्लेख किया।
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने की योजना है।
आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की चिंता
जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर भी बात की। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद को लेकर भारत की चिंताओं का जिक्र किया और कहा कि यदि साझेदार देशों में भारत की सुरक्षा प्राथमिकताओं को लेकर पर्याप्त समझ या संवेदनशीलता नहीं होगी, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
विदेश मंत्री ने आतंकवाद को भारत की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं में शामिल बताते हुए कहा कि इस विषय पर भारत की स्थिति को उसके व्यापक राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
दुनिया के सामने कई स्तरों पर चुनौतियां
जयशंकर ने वैश्विक स्थिति पर चर्चा करते हुए संघर्षों, आपूर्ति श्रृंखला की कमजोरियों और खाद्य, ईंधन, उर्वरक तथा वित्त से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने वैश्विक व्यवस्था में एक साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा और देशों की परस्पर निर्भरता को महत्वपूर्ण पहलू बताया।
ऐसे माहौल में भारत की विदेश नीति का जोर विभिन्न देशों के साथ संपर्क बनाए रखते हुए अपने हितों की रक्षा करने पर है। जयशंकर की न्यूयॉर्क में की गई टिप्पणियों ने इसी व्यापक कूटनीतिक बदलाव और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ते रुझान को रेखांकित किया है।



