Saudi-Houthi War: सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में पैगंबर मुहम्मद की मस्जिद यानी मस्जिद-ए-नबवी को बिजली उपलब्ध कराने वाले एक पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन पर ड्रोन हमला हुआ है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस हमले के लिए यमन के हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, हूती पक्ष ने इस आरोप से इनकार किया है। हमले में एक ट्रांसफॉर्मर बंद हो गया, लेकिन सऊदी अधिकारियों के मुताबिक पूरे बिजली नेटवर्क पर इसका कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।
मदीना इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहरों में से एक है और यहां स्थित मस्जिद-ए-नबवी दुनिया भर के मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। ऐसे में उस परिसर को बिजली उपलब्ध कराने वाली नागरिक सुविधा पर हमले की खबर के बाद खाड़ी और मुस्लिम देशों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाले स्टेशन पर हमला
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक, मदीना के तैबा पावर डिस्ट्रीब्यूशन स्टेशन को मंगलवार सुबह ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। उनके अनुसार जांच और ड्रोन के मलबे की जांच के बाद अधिकारियों ने हूती समूह की संलिप्तता का निष्कर्ष निकाला। हमले में एक ट्रांसफॉर्मर सेवा से बाहर हो गया, लेकिन बिजली के पूरे नेटवर्क पर इसका असर नहीं पड़ा।
सऊदी पक्ष का कहना है कि यह स्टेशन मस्जिद-ए-नबवी समेत शहर की अन्य नागरिक सुविधाओं को बिजली उपलब्ध कराता है। इसलिए सऊदी अधिकारियों ने इसे केवल एक सामान्य बिजली ढांचे पर हमला नहीं, बल्कि पवित्र स्थल से जुड़ी नागरिक सुविधा को निशाना बनाने की घटना बताया है।
हूतियों ने आरोपों से किया इनकार
सऊदी गठबंधन की ओर से हूतियों पर आरोप लगाए जाने के बाद हूती पक्ष ने जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। हूती-नियंत्रित मीडिया के जरिए एक सैन्य सूत्र ने इस आरोप को खारिज किया और इसे सऊदी दावों से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। यानी इस समय हमले को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
सऊदी अधिकारियों का दावा है कि ड्रोन के मलबे और ऑपरेशनल जांच से हूती संलिप्तता की पुष्टि हुई है, जबकि हूती पक्ष इसे नकार रहा है। ऐसे में घटना की जिम्मेदारी को लेकर दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
UAE, बहरीन और कुवैत समेत कई देशों ने जताया विरोध
मदीना में पावर स्टेशन पर हुए हमले की खबर सामने आने के बाद कई खाड़ी देशों ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत ने हमले की निंदा की। जॉर्डन ने भी सऊदी अरब के साथ अपनी एकजुटता दोहराई।
गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव ने भी इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि मस्जिद-ए-नबवी को बिजली देने वाली सुविधा को निशाना बनाना गंभीर स्थिति है। GCC ने इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और धार्मिक स्थलों से जुड़ा मामला बताया।
इस घटना के बाद यह मामला केवल सऊदी अरब और हूतियों के बीच सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पवित्र धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।
मक्का को लेकर भी सामने आया था आरोप
मदीना की घटना से पहले सऊदी अधिकारियों ने मक्का की ओर आने वाले एक हूती ड्रोन को रोकने का दावा किया था। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही मार गिराया गया था। हूतियों ने इस आरोप को भी खारिज किया था।
मदीना की घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच हाल के हफ्तों में ड्रोन और मिसाइल हमलों में तेजी आई है। सऊदी रक्षा तंत्र ने गुरुवार को दक्षिणी इलाकों की ओर दागी गई कई हूती मिसाइलों और ड्रोन को भी रोकने का दावा किया था।
हमले के बाद यमन में भी तेज हुई सैन्य कार्रवाई
मदीना के पावर स्टेशन पर हमले के बाद यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की सेना ने सना, सादा और तैज में हूती ठिकानों पर हमले करने की जानकारी दी। तैज में कुछ ही घंटों के दौरान कई हवाई हमलों का दावा किया गया।
इस घटनाक्रम से साफ है कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो रहा है। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद सीमा पार हमलों में काफी कमी आई थी, लेकिन 2026 में क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ स्थिति फिर बिगड़ती दिखाई दे रही है।
फिलहाल मदीना हमले को लेकर सऊदी पक्ष हूतियों को जिम्मेदार बता रहा है, जबकि हूती इस आरोप से इनकार कर रहे हैं। दूसरी ओर, खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया और इसके बाद यमन में हुई सैन्य कार्रवाई ने इस घटना को क्षेत्रीय तनाव के एक बड़े घटनाक्रम में बदल दिया है।



