Smit Machchhar: फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के अंदर हुए हमले के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित माछर ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। इस दौरान माछर ने विमान के भीतर हुए घटनाक्रम को अपने शब्दों में बताया और यह भी बताया कि गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्होंने दोबारा कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश क्यों की।
माछर के मुताबिक, उस समय विमान तेजी से नीचे जा रहा था और उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छा चुका था। इसके बावजूद उन्होंने कॉकपिट तक पहुंचने और दरवाजा खोलने की कोशिश नहीं छोड़ी। दरवाजा खुलने के बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को अंदर पहुंचने का मौका मिला और हमलावर को काबू किया जा सका।
पहले सब कुछ सामान्य था, फिर अचानक सिर पर पड़ा वार
माछर ने बताया कि उड़ान सामान्य तरीके से चल रही थी। सह-पायलट ने उनसे प्रार्थना करने के लिए कुछ समय मांगा। माछर ने कहा कि उन्होंने इसे सामान्य मानते हुए सामने की ओर ध्यान बनाए रखा।
करीब चार-पांच मिनट बाद उन्हें सिर के पीछे अचानक जोरदार चोट महसूस हुई। पहले उन्हें लगा कि विमान में कोई बड़ी तकनीकी समस्या आ गई है। लेकिन जब लगातार वार होते रहे तो उन्हें समझ आया कि हमला विमान में खराबी के कारण नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद सह-पायलट की ओर से किया जा रहा है।
चोट के बाद नजर धुंधली हुई, विमान भी तेजी से गिरने लगा
लगातार हमले के कारण माछर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्होंने बातचीत में बताया कि उनकी दृष्टि धुंधली पड़ने लगी थी। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान सामान्य ऊंचाई पर नहीं रह गया है और तेजी से नीचे जा रहा है।
स्थिति बेहद गंभीर होने के बावजूद उनका ध्यान सिर्फ इस बात पर था कि कॉकपिट का दरवाजा खुलना जरूरी है। बाहर मौजूद लोगों को अंदर आने का रास्ता मिलने पर ही विमान का नियंत्रण वापस हासिल किया जा सकता था।
पहली कोशिश नाकाम, दूसरी बार दरवाजा खोलने में मिली सफलता
माछर ने बताया कि उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की पहली कोशिश की थी, लेकिन सह-पायलट ने उसे फिर बंद कर दिया। इस दौरान वह खुद भी घायल होकर कॉकपिट में गिर गए थे।
कुछ देर बाद उन्होंने एक बार फिर खुद को संभाला। उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्हें लगा कि अगर दरवाजा नहीं खुला तो विमान में मौजूद बाकी लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने पूरी ताकत लगाकर दोबारा दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की और आखिरकार उसे खोल दिया।
इसके बाद बाहर मौजूद यात्रियों और क्रू सदस्यों को कॉकपिट में प्रवेश करने का मौका मिला। उन्होंने सह-पायलट को काबू किया, जबकि विमान को संभालने के लिए दो अन्य पायलटों ने जिम्मेदारी संभाली।
174 यात्रियों वाली फ्लाइट की ऐसे बची जान
फ्लाईदुबई की यह उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी और इसमें 174 यात्री सवार थे। हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे आया। बाद में विमान का रुख सऊदी अरब के तबूक की ओर किया गया, जहां इसकी आपात लैंडिंग कराई गई।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, विमान करीब दो मिनट से भी कम समय में लगभग 17 हजार फीट नीचे आया था। इसके बाद पायलट और यात्रियों की कोशिशों से विमान को सुरक्षित तरीके से उतारा जा सका।
नेतन्याहू ने कहा- आपने कई लोगों की जान बचाई
बातचीत में नेतन्याहू ने माछर के साहस की सराहना की। इजरायली प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत, इजरायल और पूरी दुनिया का हीरो बताया और कहा कि उनके प्रयासों से कई लोगों की जान बचाने में मदद मिली।
नेतन्याहू ने माछर की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली और उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
मोदी और स्मित माछर को इजरायल आने का न्योता
बातचीत का एक अहम हिस्सा नेतन्याहू का निमंत्रण रहा। इजरायली प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कैप्टन स्मित माछर को अगले इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का न्योता दिया।
उन्होंने दोनों को समारोह में मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। नेतन्याहू ने कहा कि यह भूमिका आम तौर पर इजरायली नागरिकों को दी जाती है, लेकिन वह माछर को इस समारोह में विशेष रूप से देखना चाहते हैं।
हमले की जांच अभी जारी
घटना के बाद संबंधित एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों ने घटना को आतंकी हमले के तौर पर वर्णित किया है और कहा है कि सह-पायलट ने कथित तौर पर विमान के आपातकालीन उपकरण का इस्तेमाल कर कप्तान पर हमला किया था।
मीडिया रिपोर्टों में सह-पायलट की पहचान ओमानी नागरिक हमाम अल-हम्मामी के रूप में की गई है। हालांकि, हमले के मकसद और इससे जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है।
अबूधाबी में चल रहा है इलाज
घटना के बाद कैप्टन स्मित माछर को पहले सऊदी अरब के तबूक में चिकित्सा सहायता दी गई। इसके बाद उन्हें अबूधाबी ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। भारतीय पायलट की ताजा जानकारी के मुताबिक वह मेडिकल निगरानी में रिकवर कर रहे हैं।
फ्लाईदुबई की इस घटना में कॉकपिट के भीतर शुरू हुए हमले के बावजूद विमान सुरक्षित जमीन पर पहुंचा। नेतन्याहू के साथ हुई बातचीत ने उस पूरे घटनाक्रम की एक झलक सामने रखी है, जिसमें घायल होने के बाद भी माछर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी।



