Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को मुंबई में आयोजित गर्जना मार्च के दौरान SIR की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राज ठाकरे ने अपने संबोधन में चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि चुनाव और मतदाता सूची की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। इसके साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।
राज ठाकरे ने SIR पर क्यों उठाए सवाल?
गर्जना मार्च के दौरान राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर कहा कि इसे पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए। उनका दावा था कि कानून में SIR जैसी प्रक्रिया के लिए विशेष परिस्थितियों का प्रावधान है और ऐसे में महाराष्ट्र में इसकी जरूरत क्यों पड़ी, यह सवाल उठता है।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल हैं। राज ठाकरे ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र में 40 से 60 लाख नए मतदाता जोड़े गए थे और अब SIR की प्रक्रिया में करीब दो करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात सामने आ रही है।
उन्होंने सवाल किया कि अगर इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं तो आखिर ये लोग कौन हैं और उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का आधार क्या है?
‘पहले लाखों वोटर जोड़े, अब करोड़ों हटाए जा रहे’
MNS प्रमुख ने अपने भाषण में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के आंकड़ों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान 40 से 60 लाख मतदाताओं को जोड़ा गया था और अब SIR के जरिए करीब दो करोड़ लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं।
हालांकि, ये आंकड़े राज ठाकरे की ओर से किए गए दावे हैं। इन्हें लेकर चुनाव आयोग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों और प्रक्रिया को अलग से देखना जरूरी है। राज ठाकरे ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि मतदाता सूची में इतने बड़े बदलाव आखिर क्यों हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है और लोगों को यह पता चलना चाहिए कि किसका नाम क्यों जोड़ा गया और किसका नाम क्यों हटाया जा रहा है।
सभी राजनीतिक दलों से दिल्ली जाने की अपील
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर एक साथ आने की अपील की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग दलों को अपने राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर दिल्ली जाना चाहिए और SIR को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज करानी चाहिए।
उनका कहना था कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया का मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। इसलिए सभी दलों को मिलकर इस विषय पर आवाज उठानी चाहिए।
राज ठाकरे के इस आह्वान को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि SIR को लेकर विपक्षी दल पहले से ही चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
‘2017-18 से कह रहा हूं वोट चोरी हो रही’
राज ठाकरे ने अपने पुराने बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 2017-18 से ही चुनाव में कथित ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक उन्होंने इस विषय पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात भी की थी।
राज ठाकरे ने दावा किया कि उन्होंने उस समय भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे और चुनाव के बहिष्कार की बात तक कही थी। उन्होंने कहा कि अब धीरे-धीरे लोगों को उनकी कही बातें समझ में आने लगी हैं।
हालांकि चुनाव में गड़बड़ी या वोट चोरी के उनके आरोप राजनीतिक दावे हैं और इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक जांच या चुनाव आयोग के प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच वोटरों की संख्या पर सवाल
राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दोनों चुनावों के बीच करीब छह महीने का अंतर था, लेकिन मतदाताओं की संख्या और पड़े वोटों में बड़ा अंतर दिखाई दिया।
उन्होंने सवाल किया कि छह महीने के भीतर इतने अधिक मतदाता कैसे बढ़ गए। साथ ही उन्होंने दावा किया कि विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव की तुलना में करीब एक करोड़ ज्यादा वोट पड़े।
राज ठाकरे ने इस अंतर को लेकर भी चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े अंतर दिखाई देते हैं तो चुनाव आयोग को लोगों के सवालों का जवाब देना चाहिए।
EVM की जगह बैलेट पेपर से चुनाव की मांग
गर्जना मार्च के दौरान राज ठाकरे ने EVM को लेकर भी अपना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि अब चुनाव वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने चाहिए।
उनका तर्क है कि चुनाव प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। राज ठाकरे लंबे समय से चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और इस बार उन्होंने SIR के मुद्दे के साथ इसे भी जोड़ दिया।
महाराष्ट्र में SIR को लेकर राज ठाकरे के इस बयान के बाद सियासी बहस और तेज होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर होगी कि चुनाव आयोग और राज्य के अन्य राजनीतिक दल राज ठाकरे के इन दावों और SIR को पूरी तरह रद्द करने की मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।



