UP Congress: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद आराधना मिश्रा ‘मोना’ के सामने अब संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने की चुनौती है। प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए मोना ने अपने काम करने की प्राथमिकताओं और पार्टी के लक्ष्य को लेकर स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि संगठन में किसी व्यक्ति का पद स्थायी नहीं होता। आज वह प्रदेश अध्यक्ष हैं तो भविष्य में कोई और इस जिम्मेदारी को संभालेगा। उनके मुताबिक कांग्रेस में पद से ज्यादा संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है और पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
‘पद नहीं, संगठन महत्वपूर्ण’
आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि संगठन में पद महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि संगठन सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा कि कल कोई और प्रदेश अध्यक्ष था, आज वह हैं और आने वाले समय में कोई दूसरा नेता यह जिम्मेदारी संभाल सकता है।
मोना ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पार्टी के मजबूत और ईमानदार सिपाही बताते हुए कहा कि सभी का उद्देश्य एक ही है। ऐसे में व्यक्तिगत पद या जिम्मेदारी से ऊपर उठकर संगठन को मजबूत करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना जरूरी है।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस उत्तर प्रदेश में लंबे समय से अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव संगठन और जनाधार, दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2027 में गठबंधन सरकार बनाने का लक्ष्य
नई प्रदेश अध्यक्ष ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी पार्टी की प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य 2027 में राज्य में गठबंधन सरकार बनाना है।
मोना ने बताया कि यह लक्ष्य पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं के सामने रखा गया है। इसे हासिल करने के लिए कांग्रेस को बूथ और जमीनी स्तर तक अपने संगठन को मजबूत करना होगा।
प्रदेश अध्यक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाए, संगठनात्मक ढांचे को मजबूत बनाया जाए और अलग-अलग क्षेत्रों में कांग्रेस का आधार बढ़ाया जाए। इसके साथ ही गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाना भी उनकी जिम्मेदारियों में शामिल होगा।
रीता बहुगुणा के बाद फिर महिला चेहरे पर भरोसा
आराधना मिश्रा मोना को प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपना उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इससे पहले रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं। हालांकि बाद में वह भाजपा में शामिल हो गई थीं।
अब कांग्रेस ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में महिला नेतृत्व को आगे किया है। मोना प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से विधायक हैं और लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं।
उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी चर्चा में है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और एमबीए की डिग्री हासिल की है। पार्टी के भीतर उन्हें मुखर और सक्रिय नेताओं में गिना जाता है।
ब्राह्मण और महिला वोट पर भी नजर?
मोना की नियुक्ति के राजनीतिक संदेश को उनके पारिवारिक और सामाजिक राजनीतिक आधार से जोड़कर भी देखा जा रहा है। वह राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। ऐसे में पार्टी की नजर पारंपरिक रूप से प्रभावशाली ब्राह्मण मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने पर भी हो सकती है।
इसके अलावा महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाकर कांग्रेस आधी आबादी के बीच भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि आगामी चुनाव में यह रणनीति कितनी प्रभावी रहती है, इसका आकलन संगठन के विस्तार और जमीनी स्तर पर पार्टी की सक्रियता के बाद ही किया जा सकेगा।
सड़क से सदन तक सक्रिय रही हैं मोना
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक आराधना मिश्रा ने अलग-अलग मुद्दों पर सड़क से लेकर विधानसभा तक सक्रिय भूमिका निभाई है। पार्टी के प्रदेश महासचिव मुकुंद तिवारी और प्रवक्ता हसीब अहमद ने उनके प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का स्वागत किया है।
पार्टी नेताओं का दावा है कि मोना ने ब्राह्मणों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाई है और सरकार के खिलाफ कई मामलों में मुखर रुख अपनाया है।
उनकी यही आक्रामक राजनीतिक शैली अब प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक अभियान में कितनी प्रभावी साबित होती है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।
संगठन विस्तार होगी पहली बड़ी परीक्षा
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद मोना के सामने सिर्फ चुनावी रणनीति बनाने की चुनौती नहीं है, बल्कि पार्टी संगठन को जिला और ब्लॉक स्तर तक सक्रिय करने की भी जिम्मेदारी है। कांग्रेस के सामने उत्तर प्रदेश में अपना खोया हुआ राजनीतिक आधार वापस हासिल करने की चुनौती लंबे समय से रही है।
ऐसे में नई प्रदेश अध्यक्ष की पहली परीक्षा संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और स्थानीय स्तर पर पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने की होगी।
2027 का विधानसभा चुनाव अभी सामने है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में आराधना मिश्रा मोना के लिए समय कम और जिम्मेदारी बड़ी है। उनका ‘पद नहीं, संगठन सर्वोपरि’ वाला संदेश अब जमीन पर कितना असर डालता है, इसी से उनके नेतृत्व की असली परीक्षा तय होगी।
फिलहाल कांग्रेस ने महिला नेतृत्व, संगठन विस्तार और गठबंधन की राजनीति को केंद्र में रखकर उत्तर प्रदेश में नई रणनीति का संकेत दिया है। अब देखना होगा कि मोना पार्टी के इस लक्ष्य को बूथ स्तर तक किस तरह पहुंचाती हैं और 2027 के चुनाव में कांग्रेस को इसका कितना राजनीतिक लाभ मिलता है।



