Jharkhand: झारखंड की राजधानी रांची स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) में प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य कुमार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद कैंपस में तनाव का माहौल है। छात्र का शव हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना के बाद संस्थान की व्यवस्थाओं और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नाराज छात्र खेलगांव स्थित हॉस्टल परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान के निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग की है। साथ ही, उन्होंने घटना के दौरान कथित लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग उठाई है।
छात्र की मौत के बाद कैंपस में तनाव, धरने पर बैठे विद्यार्थी
आदित्य कुमार की मौत के बाद संस्थान के विद्यार्थियों में नाराजगी है। छात्रों का कहना है कि इस घटना ने हॉस्टल की व्यवस्थाओं और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की संस्थान की तैयारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यार्थियों ने आरोप लगाया कि यदि समय पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध होती, तो छात्र को बचाने के लिए बेहतर प्रयास किए जा सकते थे।
इसी मुद्दे को लेकर छात्र हॉस्टल परिसर में धरने पर बैठ गए। उनकी प्रमुख मांगों में संस्थान के निदेशक और एकेडमिक डीन का इस्तीफा, आपातकालीन सुविधाओं की जांच और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई शामिल है। छात्रों का कहना है कि संस्थान में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
आपातकालीन व्यवस्था पर सवाल, छात्रों ने खुद CPR देने का किया दावा
प्रदर्शनकारी छात्रों के मुताबिक, घटना की जानकारी मिलने के बाद रात करीब 11 बजे हॉस्टल के कमरे का दरवाजा तोड़ा गया। उनका दावा है कि आदित्य को कमरे से नीचे उतारे जाने के समय उसकी सांसें चल रही थीं। ऐसे में विद्यार्थियों ने उसे बचाने के लिए खुद CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन देने की कोशिश की।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल की लिफ्ट खराब होने के कारण आदित्य को सीढ़ियों के रास्ते नीचे लाना पड़ा। इस घटनाक्रम को लेकर विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि आपातकालीन स्थिति में हॉस्टल में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध क्यों नहीं थीं।
CPR एक आपातकालीन प्रक्रिया है, जिसका इस्तेमाल सांस या हृदय गति रुकने जैसी गंभीर स्थिति में व्यक्ति को बचाने के प्रयास के तौर पर किया जाता है। हालांकि, आदित्य की उस समय की वास्तविक चिकित्सकीय स्थिति और उसे बचाने की कोशिशों से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
एंबुलेंस की चाबी मिलने में 15 से 20 मिनट की देरी का आरोप
इस मामले में एंबुलेंस की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्रों और परिजनों का दावा है कि एंबुलेंस की चाबी तलाशने में करीब 15 से 20 मिनट लग गए। इसके अलावा, एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसी जरूरी जीवन रक्षक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है।
विद्यार्थियों ने हॉस्टल कर्मचारियों के व्यवहार और घटना के समय संस्थान के निदेशक की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में ऐसी आपातकालीन व्यवस्था होनी चाहिए, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर छात्र को बिना देरी के चिकित्सा सहायता मिल सके।
हालांकि, एंबुलेंस की स्थिति, चाबी मिलने में हुई कथित देरी और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन दावों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के दौरान आपातकालीन व्यवस्था में वास्तव में क्या कमियां थीं।
निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग
आदित्य कुमार की मौत के बाद छात्रों का विरोध अब संस्थान के प्रशासन तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने निदेशक और एकेडमिक डीन के इस्तीफे की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने हॉस्टल की व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
छात्रों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि घटना के दौरान हुई परिस्थितियों और आपातकालीन सेवाओं की भूमिका का पता लगाया जा सके। उनका कहना है कि हॉस्टल में लिफ्ट, एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाओं की नियमित जांच होनी चाहिए, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर समय रहते मदद मिल सके।
विद्यार्थियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है। फिलहाल, छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं और संस्थान परिसर में तनाव बना हुआ है।
जांच और आधिकारिक जवाब का इंतजार
रांची IIIT में आदित्य कुमार की संदिग्ध मौत ने छात्रावासों में सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। किसी भी शिक्षण संस्थान की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित वातावरण और जरूरत के समय चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण है।
फिलहाल, आदित्य कुमार की मौत के वास्तविक कारणों और घटना के दौरान आपातकालीन व्यवस्था में कथित कमियों को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। छात्रों के आरोपों की निष्पक्ष जांच और संस्थान प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि संस्थान प्रशासन और संबंधित अधिकारी छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं।



