Supreme Court: दिल्ली में प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक-टोक, मेट्रो बंद करने और बैरिकेडिंग पर मांगा जवाब

Supreme Court: केंद्र, दिल्ली पुलिस, DMRC और रेलवे को नोटिस; शीर्ष अदालत ने सार्वजनिक परिवहन व इंटरनेट सेवा जारी रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के अधिकारों का ध्यान रखने को कहा

Supreme Court: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर लागू सुरक्षा प्रतिबंध अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के केंद्र में हैं। प्रदर्शन के मद्देनजर मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कई इलाकों में बैरिकेडिंग किए जाने के मामले में अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) और रेलवे से जवाब मांगा है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने सुनवाई के दौरान सार्वजनिक परिवहन, इंटरनेट सुविधा और नागरिकों की आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर निर्देश दिए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सुरक्षा प्रबंधों के कारण लोगों के सामान्य जीवन और मौलिक अधिकारों पर अनावश्यक असर न पड़े।

मेट्रो स्टेशन बंद करने के फैसले पर सवाल

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में बड़ी संख्या में मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने का मामला अदालत के सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने के फैसले पर सवाल उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित किया जाना चाहिए। किसी विशेष परिस्थिति में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंध आवश्यक हों, तो वे लागू कानून के अनुरूप होने चाहिए।

बैरिकेड लगाने से पहले जरूरत का आकलन जरूरी

अदालत ने शहर में लगाई गई बैरिकेडिंग की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश दिया। अधिकारियों को यातायात और कानून-व्यवस्था की स्थिति का आकलन कर यह देखना होगा कि किन स्थानों पर बैरिकेडिंग जरूरी है।

निर्देशों में इस बात पर जोर दिया गया कि लोगों की आवाजाही को अनावश्यक रूप से नहीं रोका जाना चाहिए। सुरक्षा प्रबंध करते समय आम नागरिकों के आवागमन और यातायात की जरूरतों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

इंटरनेट सेवा बाधित नहीं करने की हिदायत

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं बिना किसी अनावश्यक व्यवधान के चालू रखने का निर्देश भी दिया। अदालत के निर्देशों में सार्वजनिक परिवहन के साथ डिजिटल कनेक्टिविटी को सामान्य बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

इंटरनेट सेवाओं पर किसी तरह की रोक लगाने के लिए संबंधित कानून और परिस्थितियों के अनुरूप आधार होना जरूरी है। अदालत के निर्देशों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान सामान्य नागरिकों की जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।

हिरासत से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन हो

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अदालत ने निर्देश दिए। पीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए।

खासतौर पर उन स्थानों पर शांतिपूर्ण और निहत्थे प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने से बचने को कहा गया है, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू नहीं हैं। प्रतिबंधित क्षेत्रों में कार्रवाई संबंधित आदेशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जा सकती है।

अदालत तक पहुंच में बाधा नहीं होनी चाहिए

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के आसपास धारा 163 से संबंधित बोर्ड लगाए जाने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि ऐसे बोर्ड अभी भी लगे हुए हैं, तो उन्हें हटाया जाए।

पीठ ने कहा कि लोगों को अदालत तक पहुंचने और न्याय पाने में किसी तरह की परेशानी या आशंका नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा व्यवस्था के कारण न्यायालय तक आने-जाने का रास्ता बाधित नहीं होना चाहिए।

मौलिक अधिकारों की सुरक्षा पर जोर

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत नागरिकों को मिले अधिकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानूनी कर्तव्यों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए।

रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने बिना बैज या पहचान चिह्न के पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग किए जाने के आरोपों की जांच का मुद्दा भी उठाया। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 32 का संदर्भ देते हुए मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को रोकने की न्यायालय की जिम्मेदारी पर जोर दिया।

चार एजेंसियों को नोटिस, जवाब का इंतजार

प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों पर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस, DMRC और रेलवे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत के निर्देशों में सार्वजनिक परिवहन को सामान्य रखने, इंटरनेट सेवा जारी रखने, बैरिकेडिंग की समीक्षा करने और हिरासत के मामलों में कानून का पालन सुनिश्चित करने जैसे बिंदु शामिल हैं।

इस मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित एजेंसियों के जवाब और अदालत के अगले निर्देशों पर निर्भर करेगी। फिलहाल सुनवाई ने प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने के सवाल को प्रमुखता से सामने रखा है।

महत्वपूर्ण बात: मेट्रो स्टेशनों की संख्या और आदेश के सटीक दायरे की पुष्टि के लिए सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक आदेश तथा DMRC की ताजा सूचना देखना जरूरी है।

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