Election Commission of India: राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर सवालों को लेकर पीयूष गोयल का पलटवार, कांग्रेस के पुराने फैसलों पर उठाए सवाल

Election Commission of India: केंद्रीय मंत्री ने टीएन शेषन, एमएस गिल और अन्य पूर्व चुनाव अधिकारियों का हवाला देकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए, चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सियासी बहस तेज।

Election Commission of India चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पार्टी के पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस आज चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, जबकि अतीत में पार्टी ने कई पूर्व चुनाव अधिकारियों को अलग-अलग पदों और राजनीतिक भूमिकाओं से जोड़ा था।

गोयल ने अपने तर्क के समर्थन में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन, एमएस गिल और कुछ अन्य अधिकारियों का उल्लेख किया। उनके बयानों का मकसद कांग्रेस के मौजूदा आरोपों के जवाब में पार्टी के पुराने राजनीतिक फैसलों को सामने रखना था।

टीएन शेषन को चुनाव टिकट देने का मामला उठाया

पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। शेषन ने वर्ष 1990 से 1996 तक मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में काम किया था। गोयल ने दावा किया कि बाद में कांग्रेस ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था।

केंद्रीय मंत्री ने इस उदाहरण के जरिए कांग्रेस के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर लगातार आपत्ति जता रही है। हालांकि, गोयल के इस तर्क और उससे जुड़े राजनीतिक निष्कर्षों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

एमएस गिल के राजनीतिक सफर का भी किया उल्लेख

गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का मामला भी उठाया। गिल वर्ष 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे थे। पीयूष गोयल ने उनके कार्यकाल के बाद मिले पद्म विभूषण सम्मान और कांग्रेस से जुड़ने के बाद राज्यसभा सदस्य तथा केंद्रीय मंत्री बनने का उल्लेख किया।

गोयल के अनुसार, गिल ने चुनाव आयोग से सेवानिवृत्त होने के कुछ वर्षों बाद कांग्रेस का दामन थामा था। वह वर्ष 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा बने। इन घटनाओं का हवाला देते हुए गोयल ने कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक आलोचना पर सवाल खड़े किए।

अन्य चुनाव अधिकारियों के मामलों का भी दिया हवाला

केंद्रीय मंत्री ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा और रतन यू केलकर का भी जिक्र किया। उन्होंने टीकाराम मीणा को राजस्थान कांग्रेस की घोषणापत्र से जुड़ी टीम में शामिल किए जाने और केरल में रतन यू केलकर को मुख्य सचिव बनाए जाने के मामले को अपने तर्क से जोड़ा।

गोयल ने इन उदाहरणों के माध्यम से कांग्रेस और विपक्ष के चुनाव आयोग संबंधी आरोपों पर सवाल उठाए। हालांकि, किसी अधिकारी की सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक या प्रशासनिक पद पर नियुक्ति अपने आप में चुनाव आयोग की निष्पक्षता से समझौते का प्रमाण नहीं है। इन मामलों का मूल्यांकन संबंधित तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग के मुद्दे पर विपक्ष की सक्रियता बढ़ी

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विरोध दर्ज कराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसी सिलसिले में विपक्षी नेताओं के बीच चर्चा और बैठक की पहल भी हुई है।

विपक्षी गठबंधन ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली में मार्च निकाला। रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ा और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा एसआईआर से संबंधित मुद्दों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की बात भी सामने आई। मामले पर आगे की न्यायिक कार्यवाही को लेकर नजर बनी हुई है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सियासी बहस जारी

चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी निष्पक्षता को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कांग्रेस जहां आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी नेता पार्टी के पुराने फैसलों और नियुक्तियों का हवाला देकर जवाब दे रहे हैं।

फिलहाल, इस विवाद के केंद्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, राजनीतिक दलों का उस पर भरोसा और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं। दोनों पक्षों के दावों के बीच संबंधित तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष निकालना महत्वपूर्ण है।


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