UP Farmers: उत्तर प्रदेश में किसानों को आर्थिक सहायता देने और कृषि क्षेत्र पर सरकारी खर्च को लेकर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने योगी सरकार के कार्यकाल के आंकड़े सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने किसानों पर अब तक 69,163 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जबकि मायावती और अखिलेश यादव की सरकारों के दौरान यह राशि इससे काफी कम थी। शाही ने पिछली सरकारों की किसान नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने कृषि और किसान कल्याण को प्राथमिकता दी है।
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़, अत्यधिक बारिश, ओलावृष्टि और चक्रवात से फसलों को नुकसान झेलने वाले नौ लाख से अधिक किसानों को राहत राशि वितरित की। इसी कार्यक्रम में कृषि मंत्री ने किसान हित में किए गए कार्यों और विभिन्न योजनाओं के तहत हुए भुगतान का विवरण दिया।
पहली कैबिनेट में 36 हजार करोड़ की कर्जमाफी का फैसला
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि वर्ष 2017 में सरकार गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने इसे किसानों को आर्थिक राहत देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।
शाही के मुताबिक, मायावती सरकार के कार्यकाल में किसानों पर 10,207 करोड़ रुपये और अखिलेश यादव सरकार के दौरान करीब 12 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके मुकाबले योगी सरकार अब तक किसानों पर 69,163 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
ये आंकड़े कृषि मंत्री के बयान पर आधारित हैं। विभिन्न सरकारों के खर्च की तुलना में समयावधि और संबंधित योजनाओं के दायरे को ध्यान में रखना जरूरी है।
खाद, बीज और बिजली की उपलब्धता पर दिया जोर
शाही ने कहा कि किसानों को खेती के लिए समय पर बीज, बिजली और पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। उनके मुताबिक, कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए इन सुविधाओं की उपलब्धता अहम है।
कृषि मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष प्रदेश में 752 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ। उन्होंने इसे राज्य के कृषि क्षेत्र की उपलब्धि बताते हुए कहा कि सरकार किसानों को खेती से जुड़ी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर काम कर रही है।
आपदा राहत के वितरण को लेकर भी उठाए सवाल
कृषि मंत्री ने पिछली सरकार के समय केंद्र से मिली आपदा राहत राशि का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उस समय राहत के लिए मिले 3,200 करोड़ रुपये में से केवल 800 करोड़ रुपये ही किसानों तक पहुंचाए गए थे।
शाही ने कहा कि योगी सरकार बनने के बाद बची हुई राशि में से 1,200 करोड़ रुपये सात दिनों के भीतर किसानों के बैंक खातों में भेजे गए। उन्होंने मौजूदा सरकार की ओर से आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया।
गन्ना किसानों के भुगतान में बढ़ोतरी का दावा
गन्ना किसानों को लेकर कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में गन्ने का मूल्य बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। उन्होंने पिछली और मौजूदा सरकार के कार्यकाल में गन्ना भुगतान के आंकड़ों की तुलना करते हुए बताया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में करीब 62 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया था, जबकि योगी सरकार के कार्यकाल में यह राशि 3.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
शाही के अनुसार, प्रदेश की 105 चीनी मिलें किसानों को 15 दिनों के भीतर भुगतान कर रही हैं। उन्होंने गन्ना किसानों के बकाये के भुगतान को सरकार के प्रमुख प्रयासों में शामिल बताया।
फसल बीमा योजना से लाखों किसानों को मिला लाभ
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को मिली क्षतिपूर्ति का ब्यौरा देते हुए शाही ने बताया कि वर्ष 2017-18 से अब तक 6,125 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में आपदा से प्रभावित 7.31 लाख किसानों को योजना के तहत 812.76 करोड़ रुपये दिए गए। कृषि मंत्री के मुताबिक, इस वर्ष फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या भी पिछले साल के लगभग 18 लाख से बढ़कर 23 से 24 लाख हो गई है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को फसल नुकसान के सर्वे और क्षतिपूर्ति वितरण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
जालौन में भी किसानों को मिलेगा बीमा भुगतान
कृषि मंत्री ने जालौन जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब पांच करोड़ रुपये किसानों को अंतरित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल बर्बाद होने पर किसानों को समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
फसल नुकसान का आकलन, पात्र किसानों की पहचान और मुआवजे का समय पर भुगतान राहत व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। सरकार ने इन प्रक्रियाओं को तेज करने पर जोर दिया है।
मायावती और अखिलेश सरकार पर कृषि मंत्री का हमला
सूर्य प्रताप शाही ने अपने बयान में पूर्ववर्ती सरकारों की किसान नीतियों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खुद को धरतीपुत्र और किसानपुत्र कहने वाले नेताओं के कार्यकाल में किसानों के लिए उतना काम नहीं हुआ, जितना मौजूदा सरकार ने किया है।
कृषि मंत्री ने कर्जमाफी, फसल बीमा, गन्ना भुगतान और आपदा राहत से जुड़े आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी। हालांकि, पिछली सरकारों और मौजूदा सरकार के प्रदर्शन का व्यापक आकलन करने के लिए इन आंकड़ों के साथ योजनाओं की अवधि, लाभार्थियों की संख्या और खर्च की श्रेणियों की भी तुलना जरूरी होगी।
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को राहत देने पर जोर
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रभावित किसानों को राहत राशि दिए जाने के साथ कृषि मंत्री ने किसान कल्याण योजनाओं का विवरण साझा किया। सरकार की ओर से फसल बीमा, कृषि सुविधाओं और भुगतान व्यवस्था को लेकर किए गए प्रयासों का उल्लेख किया गया।
अब इन योजनाओं के प्रभाव का आकलन इस आधार पर भी महत्वपूर्ण होगा कि कितने पात्र किसानों को समय पर सहायता मिली, फसल नुकसान के दावों का निस्तारण कितनी तेजी से हुआ और किसानों को वास्तविक रूप से कितनी राहत पहुंची।



