Israel Election 2026: इस्राइल के आम चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता में वापसी का रास्ता अभी साफ नहीं हुआ है। शुरुआती एग्जिट पोल में विपक्षी गठबंधन को बढ़त दिखाई गई थी, लेकिन मतगणना के दौरान सामने आए रुझानों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन आगे निकलता दिखा। इसके बावजूद वह संसद में बहुमत के जरूरी आंकड़े से पीछे है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के चुनावी प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को देते हुए दावा किया कि उनके समर्थन के बाद चुनाव का माहौल बदला।
28 अक्टूबर को जारी मतगणना अपडेट के अनुसार, 66.2 प्रतिशत मतपेटियों की गिनती के बाद नेतन्याहू के गठबंधन को 56 सीटें, जबकि विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 48 सीटें मिलने का अनुमान था। अरब नेतृत्व वाले दलों के खाते में 16 सीटें दिखाई गईं। हालांकि, ये शुरुआती आंकड़े थे और अंतिम परिणाम के लिए पूरी मतगणना जरूरी है। इस्राइल की 120 सदस्यीय संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन चाहिए
एग्जिट पोल में विपक्ष को मिली थी बढ़त
मतदान समाप्त होने के बाद जारी किए गए कई एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गठबंधन को विपक्ष से पीछे दिखाया गया था। चैनल 12, चैनल 13 और सरकारी प्रसारक कान के अनुमानों में विपक्षी गठबंधन को लगभग 51 से 53 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी, जबकि नेतन्याहू के गठबंधन के लिए करीब 50 से 52 सीटों का अनुमान था।
हालांकि, i24NEWS के एग्जिट पोल में तस्वीर अलग थी। इसमें नेतन्याहू के गठबंधन को 55 और विपक्षी गठबंधन को 49 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। इस तरह अलग-अलग सर्वेक्षणों में नतीजों को लेकर एकराय नहीं थी।
एग्जिट पोल मतदान के बाद मतदाताओं से मिली जानकारी के आधार पर तैयार किए जाते हैं। इनके अनुमान वास्तविक मतगणना से अलग हो सकते हैं। इस चुनाव में भी शुरुआती रुझानों और एग्जिट पोल के बीच अंतर दिखाई दिया। इसके अलावा सैनिकों और विदेशों में तैनात इस्राइली प्रतिनिधियों सहित कुछ मतदाताओं के डबल-लिफाफे वाले मतों की गिनती बाद में की जाती है। ऐसे मतों की जांच और गिनती से सीटों का गणित बदल सकता है।
ट्रंप ने नेतन्याहू के प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्राइल के चुनावी घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू के प्रदर्शन में सुधार का श्रेय अपने समर्थन को दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर इरविंग सी. श्वार्ट्ज की एक टिप्पणी साझा की। इस टिप्पणी में दावा किया गया था कि ट्रंप के नेतन्याहू का समर्थन करने के बाद चुनावी माहौल बदल गया।
टिप्पणी के मुताबिक, पहले नेतन्याहू के लिए बड़ी चुनावी हार की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन बाद में मुकाबला करीबी होता दिखाई दिया। ट्रंप ने इससे पहले टेक्सास में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भी कहा था कि एग्जिट पोल में नेतन्याहू अच्छा प्रदर्शन करते दिख रहे हैं और उनके समर्थन से प्रधानमंत्री को मदद मिली होगी।
हालांकि, ट्रंप का यह आकलन राजनीतिक दावा है। केवल एग्जिट पोल और शुरुआती रुझानों के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी नेता के समर्थन से मतदाताओं का रुख कितना बदला। इसके लिए चुनावी आंकड़ों और मतदाताओं के व्यवहार का अलग से विश्लेषण जरूरी होगा।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष पर भी ट्रंप ने दोहराया दावा
इस्राइल चुनाव पर बयान के साथ ही ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव कम कराने में अपनी भूमिका का दावा भी दोहराया। टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी में मध्यावधि चुनाव से जुड़ी रैली के दौरान उन्होंने कहा कि दोनों देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी देकर उन्होंने व्यापार को दबाव के साधन के रूप में इस्तेमाल किया था।
ट्रंप ने दावा किया कि परमाणु हथियारों से लैस दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष को रोकने में आर्थिक दबाव की भूमिका रही। उन्होंने अपने कार्यकाल में आठ युद्ध खत्म कराने के दावे का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें से पांच मामलों में व्यापार से जुड़े उपायों का इस्तेमाल किया गया था।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर ट्रंप पहले भी मध्यस्थता का श्रेय लेते रहे हैं। हालांकि, उनके इस दावे और संघर्ष समाप्त होने की परिस्थितियों को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है। उनका बयान अपने आप में इस बात का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है कि युद्धविराम केवल टैरिफ की धमकी के कारण हुआ।
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और विपक्ष के सामने चुनौती
एग्जिट पोल में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी को सबसे बड़ी एकल पार्टी के रूप में उभरते हुए दिखाया गया था। लेकिन किसी एक पार्टी का सबसे बड़ी पार्टी बनना और उसके गठबंधन का बहुमत हासिल करना दो अलग बातें हैं। इस्राइल में सरकार बनाने के लिए संसद में बहुमत का समर्थन जुटाना जरूरी है।
विपक्षी नेता और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट ने वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करने की बात कही है। दूसरी ओर, नेतन्याहू के सहयोगी गिदोन सार ने उन एग्जिट पोल को विपक्ष की निर्णायक जीत मानने से आगाह किया, जिनमें लिकुड को सबसे बड़ी पार्टी बताया गया था।
अब सरकार गठन के लिए अलग-अलग दलों के बीच बातचीत महत्वपूर्ण होगी। अगर किसी भी बड़े गठबंधन को अपने दम पर 61 सीटों का समर्थन नहीं मिलता, तो छोटे दलों और अरब नेतृत्व वाले राजनीतिक समूहों की भूमिका अहम हो सकती है।
अरब दलों के समर्थन से बन सकता है सरकार गठन का गणित
शुरुआती अनुमानों में अरब नेतृत्व वाले दलों को कुल 16 से 18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। मतगणना के दौरान भी इन दलों की सीटें सरकार गठन के गणित में महत्वपूर्ण दिखाई दीं। हालांकि, किसी दल के पास सीटें होना और उसका किसी गठबंधन को समर्थन देना अलग-अलग बातें हैं।
इस्राइल में अरब दलों की सरकारों में भागीदारी का इतिहास सीमित रहा है। वर्ष 2021 में राम पार्टी तत्कालीन गठबंधन सरकार में शामिल हुई थी। मौजूदा चुनाव में भी इन दलों का समर्थन, बाहरी सहयोग या मतदान के समय अपनाया गया रुख सत्ता गठन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
सुरक्षा और नेतृत्व की जवाबदेही भी चुनाव के अहम मुद्दे
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद यह इस्राइल का पहला आम चुनाव है। चुनाव के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। करीब 19 वर्षों से इस्राइली राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल नेतन्याहू को पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट और उनकी याशर पार्टी से चुनौती मिली।
फिलहाल मतगणना पूरी होने और सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ने तक सत्ता का अंतिम समीकरण स्पष्ट नहीं है। नेतन्याहू के गठबंधन का शुरुआती बढ़त हासिल करना अपने आप में बहुमत की गारंटी नहीं है। ट्रंप ने इस प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया है, लेकिन इस दावे की वास्तविक चुनावी भूमिका को लेकर अभी कोई निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।



