Israel Election 2026: इजरायल चुनाव में बदलाव की आवाज, नेतन्याहू की नीतियों पर मतदाताओं ने उठाए सवाल

Israel Election 2026: इजरायल चुनाव में मतदाताओं ने नेतन्याहू की नीतियों पर सवाल उठाए और बदलाव की मांग की।

Israel Election 2026: इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य और सरकार गठन के समीकरणों के बीच मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को संसदीय चुनाव के लिए मतदान शुरू हुआ। इस चुनाव में मतदाता 26वीं नेसेट यानी संसद के सदस्यों का चुनाव कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 73 लाख नागरिक मतदान के पात्र हैं और देशभर में 6,209 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।

मतदान के बीच कुछ मतदाताओं ने मौजूदा सरकार की नीतियों पर असहमति जताई और देश में बदलाव की जरूरत बताई। वहीं, कुछ लोगों ने चुनाव में अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी को जरूरी बताते हुए उम्मीद जताई कि नई सरकार देश की परिस्थितियों में सुधार लाने के लिए काम करेगी।

‘इजरायल को तानाशाही से बचाना जरूरी’

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में एक मतदाता ने कहा कि वह देश को तानाशाही की ओर बढ़ने से बचाने के लिए वोट डालने आया है। उसने आशंका जताई कि बेंजामिन नेतन्याहू के दोबारा सत्ता में आने पर ऐसी स्थिति बन सकती है।

मतदाता ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू के नेतृत्व में इजरायली समाज के भीतर विभाजन बढ़ा है। उसके अनुसार, लोगों को अलग-अलग समूहों में बांटने वाली राजनीति देश की एकता के लिए ठीक नहीं है।

उसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मामले में भी बदलाव की जरूरत बताई। मतदाता का कहना था कि नेतन्याहू का रवैया काफी सख्त है और देश को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना चाहिए। हालांकि, ये उस मतदाता के व्यक्तिगत विचार हैं और इन्हें इजरायल के सभी नागरिकों की राय नहीं माना जा सकता।

मतदाताओं ने वोट डालने को बताया अहम

एक अन्य इजरायली मतदाता ने कहा कि चुनाव में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है। उसने लोगों से अपील की कि वे अपनी पसंद की पार्टी को वोट देने के लिए मतदान केंद्र तक जरूर पहुंचें।

मतदाता ने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद बनने वाली सरकार देश को बेहतर दिशा में ले जाने का प्रयास करेगी। उसके मुताबिक, अगला प्रधानमंत्री नेतन्याहू हों या कोई अन्य नेता, सरकार को हालात सुधारने के लिए गंभीरता से काम करना चाहिए।

इस बयान से चुनाव को लेकर एक अलग नजरिया भी सामने आया, जिसमें मतदाता ने किसी खास नेता के समर्थन या विरोध के बजाय सरकार की जवाबदेही और भविष्य में सुधार की उम्मीद पर जोर दिया।

‘देश को बदलाव की जरूरत है’

उजिएल खजान नाम के एक अन्य मतदाता ने एएनआई से बातचीत में कहा कि उसके लिए इस चुनाव में वोट डालना बेहद महत्वपूर्ण है। उसने कहा कि इजरायल इस समय नाजुक दौर से गुजर रहा है और देश को बदलाव की आवश्यकता है।

खजान ने दावा किया कि करीब 2.5 लाख लोग इजरायल छोड़कर जा चुके हैं। उसने कहा कि इनमें हाईटेक उद्योग के विशेषज्ञ और अन्य पेशेवर लोग भी शामिल हैं। उसके मुताबिक, यदि चुनाव के बाद देश में बदलाव दिखाई देता है, तो विदेश जा चुके कुछ लोग वापस लौटने पर विचार कर सकते हैं।

उसने यह भी कहा कि पिछले दो दशकों में लोकतंत्र, कानून के सम्मान, आपसी विश्वास और राष्ट्रीय एकता को लेकर स्थिति कमजोर हुई है। हालांकि, देश छोड़ने वाले लोगों की संख्या और इसके कारणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर नजरें

इजरायल के संसदीय चुनाव में मतदाताओं की पसंद के साथ सरकार गठन और गठबंधन की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण होंगी। देश की संसदीय व्यवस्था में सरकार बनाने के लिए दलों के बीच समर्थन जुटाना अहम होता है। ऐसे में चुनाव का अंतिम राजनीतिक असर केवल शुरुआती मतदान या कुछ मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं से तय नहीं किया जा सकता।

मतदान के दौरान सामने आए बयानों में लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता, शासन की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर चिंताएं दिखाई दीं। हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं को पूरे देश के मतदाताओं के रुख का प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए।

अब चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाली गठबंधन संबंधी बातचीत से स्पष्ट होगा कि इजरायल की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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