Ram Gopal Yadav: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में मतदाता सूची से सपा समर्थकों के नाम हटाने के लिए सरकारी लॉगिन आईडी और पासवर्ड का कथित तौर पर दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कुछ अधिकारी अपनी लॉगिन संबंधी जानकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को उपलब्ध करा रहे हैं, जिसके जरिए मतदाताओं के नाम हटाने और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया प्रभावित की जा रही है।
रामगोपाल यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए निर्वाचन आयोग से जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने शिकायतों और आशंकाओं की जांच कराने का भरोसा दिया है।
SDM की आईडी और पासवर्ड को लेकर लगाया आरोप
रामगोपाल यादव का आरोप है कि कुछ एसडीएम अधिकारियों की लॉगिन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल दूसरे लोग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़े कार्यकर्ता इन जानकारियों के माध्यम से मतदाता सूची में बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं।
सपा नेता के मुताबिक, इस प्रक्रिया में वोटर लिस्ट से समाजवादी पार्टी के समर्थकों के नाम हटाने और भाजपा समर्थकों के नाम जोड़ने की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में ओटीपी ऐसे मोबाइल नंबर पर पहुंचता है, जिस पर भाजपा कार्यकर्ताओं का नियंत्रण है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
हर विधानसभा क्षेत्र में 10 हजार वोट काटने का दावा
रामगोपाल यादव ने दावा किया कि कथित गड़बड़ी के जरिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है, क्योंकि इसका सीधा असर चुनावी प्रक्रिया पर पड़ता है।
उन्होंने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले को गंभीरता से लेने और यह पता लगाने की मांग की कि सरकारी अधिकारियों की लॉगिन जानकारी दूसरे लोगों तक कैसे पहुंच रही है।
चुनाव आयोग ने दिया जांच का भरोसा
रामगोपाल यादव के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रतिक्रिया सामने आई। कार्यालय की ओर से कहा गया कि यदि किसी विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को लेकर शिकायत या संदेह है, तो उसकी तत्काल जांच कराई जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोप सही पाए जाने पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रतिक्रिया के बाद अब मामले की जांच और उससे सामने आने वाले तथ्यों पर नजर रहेगी।
SIR के दौरान मतदाता सूची को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस
उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। समाजवादी पार्टी पहले भी मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाती रही है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा चुके हैं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची तैयार करने में निष्पक्षता और पारदर्शिता बरती जानी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न हटे।
वहीं, निर्वाचन आयोग की ओर से शिकायतों की जांच और नियमों के अनुसार कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी आरोपों की सच्चाई
रामगोपाल यादव के आरोपों ने उत्तर प्रदेश में SIR और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन आयोग की जांच में सरकारी लॉगिन आईडी और पासवर्ड के कथित दुरुपयोग को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल, सपा सांसद के आरोपों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जांच संबंधी आश्वासन के बीच मामले की निष्पक्ष जांच अहम है। इससे ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मतदाता सूची में किसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं।



