Gig Workers: ऐप से काम करने वालों के लिए सामाजिक सुरक्षा की तैयारी, केंद्र ने गठित किया नेशनल बोर्ड

Gig Workers: Swiggy, Zomato, Uber और Ola से जुड़े कामगारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं पर करेगा मंथन, श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया संभालेंगे अध्यक्ष की जिम्मेदारी

Gig Workers: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करने वाले लाखों लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए केंद्र सरकार ने नई पहल की है। श्रम मंत्रालय ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के साथ असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के हितों के लिए नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन किया है। यह बोर्ड इन कामगारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने और सरकार को सुझाव देने का काम करेगा।

इस बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया करेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के अलावा कंपनियों, श्रमिक संगठनों और संबंधित सामाजिक सुरक्षा संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इस पहल से Swiggy, Zomato, Uber और Ola जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कामगारों को भविष्य में PF, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ देने का रास्ता तैयार हो सकता है।

बोर्ड का मुख्य काम क्या होगा?

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का प्रमुख उद्देश्य गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए मौजूद सामाजिक सुरक्षा की कमियों को दूर करने के उपाय सुझाना है। बोर्ड ऐसे कामगारों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करेगा और उनकी निगरानी से जुड़े सुझाव भी देगा।

इसके अलावा बोर्ड सरकार को बताएगा कि प्रस्तावित योजनाओं के लिए धन की व्यवस्था किस तरह की जाए और उपलब्ध बजट का इस्तेमाल कैसे हो। बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर सरकार आगे की योजनाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर निर्णय ले सकती है।

बोर्ड में कंपनियों और श्रमिकों को भी मिलेगी जगह

सरकार की ओर से गठित इस बोर्ड में अलग-अलग पक्षों की भागीदारी रखी गई है। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके साथ ही बड़ी कंपनियों के पांच प्रतिनिधि और कामगारों के पांच प्रतिनिधियों को भी जगह दी जाएगी।

बोर्ड में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC), सिविल सोसाइटी और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य योजनाएं तैयार करते समय कामगारों, कंपनियों और सरकारी संस्थानों के विचारों को ध्यान में रखना है।

साल में तीन बार होगी बैठक

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड की बैठक साल में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में गिग वर्कर्स और पारंपरिक असंगठित श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जाएगा।

बोर्ड सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जरूरत, उनके लाभार्थियों और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों पर सरकार को सलाह देगा। साथ ही योजनाओं की प्रगति और प्रभाव की निगरानी के लिए भी सुझाव दे सकेगा।

क्या अब डिलीवरी पार्टनर्स को मिलने लगेगा PF और इंश्योरेंस?

बोर्ड के गठन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब Swiggy, Zomato के डिलीवरी पार्टनर्स और Uber-Ola के ड्राइवरों को PF और बीमा मिलने लगेगा? फिलहाल इसका जवाब नहीं है। सरकार ने अभी किसी नई PF या इंश्योरेंस योजना को लागू करने की घोषणा नहीं की है।

मौजूदा कदम का मकसद ऐसी योजनाओं को तैयार करने के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाना है। आगे बोर्ड की सिफारिशों और सरकार के फैसले के बाद ही यह तय होगा कि किन कामगारों को कौन-सी सुविधा मिलेगी, पात्रता की शर्तें क्या होंगी और योजनाएं कब से लागू की जाएंगी।

सोशल सिक्योरिटी कोड के तहत बनाया गया बोर्ड

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020 के प्रावधानों के तहत किया गया है। इस कानून में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े नौ पुराने केंद्रीय कानूनों को एक व्यापक ढांचे में समाहित किया गया है।

इसका उद्देश्य संगठित क्षेत्र के साथ असंगठित श्रमिकों, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स तक भी सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था करना है। दी गई जानकारी के अनुसार, यह कोड नवंबर 2025 में लागू हुआ था।

कौन होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?

गिग वर्कर्स वे लोग होते हैं, जो किसी एक स्थायी नौकरी के बजाय अलग-अलग काम या असाइनमेंट के आधार पर कमाई करते हैं। उन्हें आमतौर पर किए गए काम या सेवा के हिसाब से भुगतान मिलता है।

प्लेटफॉर्म वर्कर्स ऐसे कामगार होते हैं, जो डिजिटल ऐप या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम प्राप्त करते हैं। उदाहरण के तौर पर:

  • Swiggy और Zomato के डिलीवरी पार्टनर्स
  • Uber और Ola के कैब ड्राइवर
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सेवाएं देने वाले स्वतंत्र कामगार

इनमें से कई लोगों को पारंपरिक नौकरी की तरह नियमित वेतन, भविष्य निधि और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। इसी वजह से लंबे समय से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की मांग की जा रही है।

अब योजनाओं की सिफारिशों पर रहेगी नजर

नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड के गठन से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने की प्रक्रिया को संस्थागत आधार मिला है। अब बोर्ड इन कामगारों की जरूरतों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अंतर का आकलन कर सरकार को सुझाव देगा।

हालांकि, वास्तविक लाभ कब से मिलेगा और किन श्रमिकों को इसका फायदा मिलेगा, यह आगे बनने वाली योजनाओं और सरकार की अधिसूचनाओं से स्पष्ट होगा। फिलहाल बोर्ड का गठन इस दिशा में शुरुआती कदम है।

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