Iran US Conflict: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशें एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बीच ईरान ने अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई ने कहा है कि यदि वॉशिंगटन इन मांगों को स्वीकार करता है तो दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीति का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, तेहरान ने अपने रुख में नरमी के संकेत देने के साथ सैन्य कार्रवाई को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है। रेजाई ने कहा कि ईरान पर किसी भी नए हमले का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। उन्होंने सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनेई के निर्देशों का हवाला देते हुए नए हथियारों के इस्तेमाल की संभावना भी जताई।
कतर की मध्यस्थता से बातचीत की कोशिश
अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को कतर के मध्यस्थों ने तेहरान में 12 घंटे से ज्यादा समय तक बातचीत की। इस पहल को ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
ईरान की ओर से सात शर्तें रखे जाने के बाद अब बातचीत की दिशा इन मांगों पर अमेरिकी प्रतिक्रिया से तय हो सकती है। तेहरान आर्थिक प्रतिबंधों में राहत चाहता है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले रियायत मिलने पर जोर दे रहा है।
ईरान की मांगों में तेल निर्यात और आर्थिक प्रतिबंध प्रमुख
ईरान की ओर से रखी गई सात शर्तों में से उपलब्ध रिपोर्ट में कुछ प्रमुख मांगों का ही विवरण सामने आया है। इनमें तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में राहत, विदेशों में जमा ईरानी धन की वापसी और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना शामिल है।
तेहरान चाहता है कि अमेरिका उसके तेल निर्यात पर लगी रोक में ढील दे, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने तेल की बिक्री कर सके। इसके अलावा ईरान ने विदेशों में जमा अपनी संपत्ति वापस दिलाने की मांग भी उठाई है। रिपोर्ट में कतर में जमा करीब 6 अरब डॉलर की रकम का उल्लेख किया गया है।
ईरान का दावा है कि जून 2026 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत अमेरिका ने तेल निर्यात में छूट देने और नई पाबंदियां नहीं लगाने का आश्वासन दिया था। तेहरान अब इसी कथित समझौते के आधार पर प्रतिबंधों में राहत चाहता है।
परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की शर्त
ईरान की मांगों के जवाब में अमेरिका का रुख अलग बताया जा रहा है। वॉशिंगटन चाहता है कि बातचीत दोबारा शुरू होने से पहले तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतें दे।
परमाणु गतिविधियों पर नियंत्रण अमेरिका की प्रमुख चिंताओं में शामिल है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने के लिए इस मुद्दे पर सहमति बनना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल ईरान आर्थिक प्रतिबंधों और अपनी संपत्ति की वापसी को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर आश्वासन चाहता है।
ईरान ने हमले की स्थिति में कड़े जवाब की दी चेतावनी
कूटनीतिक बातचीत की संभावना के बीच ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी सैन्य हमले का जवाब देने के लिए तैयार है। मोहसेन रेजाई ने कहा कि यदि अमेरिका दोबारा हमला करता है तो ईरान चुप नहीं बैठेगा।
उन्होंने दावा किया कि सर्वोच्च नेता मुजतबा खमेनेई के निर्देशों के तहत जरूरत पड़ने पर नए हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन हथियारों की प्रकृति और संभावित सैन्य रणनीति के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
क्या सात शर्तों पर अमेरिका देगा सहमति?
ईरान की सात मांगों और अमेरिका की परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तों के बीच समझौते की राह चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। दोनों देशों के बीच बातचीत शुरू होने के लिए आर्थिक प्रतिबंधों, तेल निर्यात और परमाणु गतिविधियों जैसे मुद्दों पर सहमति जरूरी होगी।
कतर की मध्यस्थता से हुई बातचीत के बाद कूटनीतिक प्रयासों को लेकर उम्मीद बनी है, लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका ईरान की मांगों को स्वीकार करेगा या नहीं। फिलहाल तेहरान ने बातचीत का विकल्प खुला रखा है और साथ ही सैन्य जवाब देने की चेतावनी भी दोहराई है।



