UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को लेकर बड़ा फैसला किया है। बीजेपी ने सात अलग-अलग मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति की है। नई टीम में वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों को भी जिम्मेदारी दी गई है। पार्टी की ओर से की गई इन नियुक्तियों को संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई नियुक्तियों में बस्ती से सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया को एसटी मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, आंध्र प्रदेश की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
बीजेपी ने इन नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी
- महिला मोर्चा – डी. पुरंदेश्वरी
- युवा मोर्चा – हरीश द्विवेदी
- OBC मोर्चा – बैजयंत पांडा
- SC मोर्चा – संजय भाटिया
- ST मोर्चा – सतीश पूनिया
- किसान मोर्चा – लाल सिंह आर्य
- अल्पसंख्यक मोर्चा – गजेंद्र पटेल
वरिष्ठ नेताओं के साथ युवा चेहरों पर भरोसा
पार्टी की नई टीम में कई अनुभवी नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं। संजय भाटिया को SC मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वह हरियाणा से राज्यसभा सदस्य हैं और बीजेपी में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
OBC मोर्चे की जिम्मेदारी बैजयंत पांडा को दी गई है। वह बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और ओडिशा की राजनीति में उनका लंबा अनुभव रहा है। वहीं किसान मोर्चे का प्रभार मध्य प्रदेश के वरिष्ठ नेता लाल सिंह आर्य को सौंपा गया है। वह राज्य में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।
ST मोर्चे की जिम्मेदारी राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया को दी गई है। वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वहीं अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभार गजेंद्र पटेल को सौंपा गया है, जो मध्य प्रदेश से सांसद हैं और बीजेपी में राष्ट्रीय महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
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2027 चुनाव से पहले संगठन पर फोकस
बीजेपी की इन नियुक्तियों को आगामी चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अलग-अलग मोर्चों की जिम्मेदारी तय करने के जरिए पार्टी का फोकस विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच संगठन की गतिविधियों को मजबूत करने पर है। यूपी जैसे बड़े राज्य में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक स्तर पर यह बदलाव बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।



