BRICS Summit 2026: BRICS शिखर सम्मेलन से पहले भारत में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम में वैश्विक आर्थिक सहयोग और व्यापार को लेकर भारत की प्राथमिकताएं सामने आईं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि BRICS का उद्देश्य केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि सदस्य देशों के नागरिकों के लिए रोजगार, संपत्ति और समृद्धि के नए अवसर तैयार करना भी है। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने BRICS सहयोग के 20 वर्ष पूरे होने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए इस वर्ष को भारत के लिए मील का पत्थर करार दिया।
BRICS आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला समूह बन चुका है। इसके सदस्य देश वैश्विक आबादी के करीब आधे हिस्से और विश्व की कुल जीडीपी के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैश्विक व्यापार में भी समूह की हिस्सेदारी करीब एक चौथाई है। ऐसे में भारत की मेजबानी में होने वाला BRICS सम्मेलन आर्थिक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
व्यापार और सप्लाई चेन पर भारत का जोर
पीयूष गोयल ने BRICS देशों के बीच व्यापार को भविष्य की आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसमें केवल तैयार उत्पाद ही नहीं, बल्कि कच्चे माल और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता भी शामिल है।
भारत इंजीनियरिंग उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में अपनी वैश्विक मौजूदगी लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में BRICS देशों के बाजार भारतीय कंपनियों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं। गोयल ने इस बात पर भी जोर दिया कि सप्लाई चेन को मजबूत और लचीला बनाने के लिए दोनों दिशाओं में व्यापार को बढ़ावा देना जरूरी है।
उन्होंने गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, नियामकीय प्रक्रियाओं को आसान बनाने और माल की खेपों की तेजी से मंजूरी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इससे सदस्य देशों के बीच व्यापार की लागत कम करने और कारोबारी गतिविधियों को गति देने में मदद मिल सकती है।
कृषि से लेकर सर्विस सेक्टर तक सहयोग बढ़ाने की तैयारी
BRICS देशों के बीच सहयोग का दायरा केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रखने पर भी जोर दिया गया। कृषि क्षेत्र में एग्रीटेक स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई गई, ताकि नई तकनीकों के इस्तेमाल से खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
वहीं सेवा क्षेत्र में बाजार खोलने और पेशेवरों की सीमापार आवाजाही को आसान बनाने की बात भी सामने आई। भारत के लिए यह क्षेत्र खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि आईटी, डिजिटल सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में देश की मजबूत मौजूदगी है।
महिला उद्यमिता को लेकर भी भारत ने अपनी उपलब्धियों को सामने रखा। देश के 2.5 लाख से अधिक स्टार्टअप्स में 45 प्रतिशत से ज्यादा में महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका होने का दावा किया गया। BRICS वूमेन बिजनेस एलायंस की बैठक को भी महिला नेतृत्व वाले कारोबारों के लिए वैश्विक अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच बताया गया।
UPI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की ताकत
भारत ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी BRICS सहयोग का अहम क्षेत्र बनाने पर जोर दिया है। UPI को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। भारत का मानना है कि BRICS देशों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़कर स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इससे डॉलर पर निर्भरता को कम करने के साथ-साथ सीमा पार भुगतान को आसान और तेज बनाने में मदद मिल सकती है। भारत अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और नई तकनीकों के जरिए 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात लगातार करता रहा है।
जयशंकर ने 20 साल के सहयोग को बताया अहम पड़ाव
BRICS बिजनेस फोरम के उद्घाटन के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी समूह के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह वर्ष इसलिए विशेष है क्योंकि संस्थागत BRICS सहयोग के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उनके मुताबिक यह केवल बीते दो दशकों की उपलब्धियों को देखने का अवसर नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए सहयोग की नई दिशा तय करने का भी समय है।
भारत की अध्यक्षता में BRICS को व्यापार, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, कृषि, महिला उद्यमिता और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में आगामी BRICS शिखर सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ-साथ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर भारत की भूमिका पर भी दुनिया की नजर रहेगी।
BRICS का बढ़ता आर्थिक प्रभाव भारत के लिए अपनी कारोबारी क्षमता और डिजिटल मॉडल को वैश्विक मंच पर रखने का बड़ा अवसर है। व्यापार को विकास का आधार बनाकर भारत समूह के भीतर अपनी भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश में है। आने वाले समय में यह सहयोग वैश्विक अर्थव्यवस्था और बदलती व्यापार व्यवस्था पर कितना असर डालता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।



