Supreme Court Hearing: अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा अनियमितता मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जांच की दिशा और प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष विशेष जांच दल (SIT) ने अब तक की जांच का विवरण प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जांच एजेंसी ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में जमा कर दी है। उन्होंने कहा कि मामले में दर्ज पहली गिरफ्तारी को लगभग 90 दिन पूरे होने वाले हैं और जांच एजेंसी जल्द ही आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी करना चाहती है।
जांच में क्या-क्या सामने आया?
अदालत को बताया गया कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए कई स्तरों पर जांच की गई है। इसमें फॉरेंसिक ऑडिट, सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा और वित्तीय लेनदेन का विश्लेषण शामिल है। जांच एजेंसी ने संबंधित व्यक्तियों के बैंक खातों और संपत्तियों की भी पड़ताल की है।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्य कांत ने कहा कि SIT द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी ने कथित तौर पर कुछ ऐसी गतिविधियों की पहचान की है, जिनकी विस्तृत जांच की गई है। साथ ही कुछ बरामदगी होने की जानकारी भी अदालत को दी गई।
काउंटिंग सिस्टम भी जांच के दायरे में
SIT ने अदालत को बताया कि चढ़ावे की गिनती और उसके प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रिया की भी बारीकी से जांच की गई। रिपोर्ट के अनुसार काउंटिंग रूम में धनराशि की गिनती और हैंडलिंग के दौरान प्रक्रियागत कमियों के संकेत मिले हैं। इन्हीं पहलुओं को आधार बनाकर जांच आगे बढ़ाई गई।
जांच एजेंसी का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों को एकत्र कर उनका विश्लेषण किया गया है, ताकि पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि SIT अपनी जांच पूरी कर चुकी है और आरोपपत्र दाखिल करना चाहती है, तो वह कानून के तहत आगे की कार्रवाई कर सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित न्यायालय मामले की सुनवाई आगे बढ़ाएगा।
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और संबंधित धाराओं को देखते हुए आगे की न्यायिक प्रक्रिया सक्षम सत्र न्यायालय के समक्ष चलेगी।
आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर SIT की प्रस्तावित चार्जशीट पर टिकी है। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। मामला धार्मिक आस्था और सार्वजनिक धन प्रबंधन से जुड़ा होने के कारण लगातार चर्चा में बना हुआ है।
अस्वीकरण: मामला न्यायालय में विचाराधीन है। जांच एजेंसियों के दावे और निष्कर्ष अंतिम न्यायिक निर्णय नहीं माने जाएंगे। अंतिम फैसला संबंधित अदालत द्वारा सुनवाई पूरी होने के बाद ही दिया जाएगा।



