कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में सोमवार को दिल्ली की अदालत ने अहम आदेश दिया। द्वारका कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने उस मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली शिकायत को खारिज कर दिया गया था।
अदालत ने मामले को फिर से मजिस्ट्रेट के पास भेजते हुए नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।
क्या है सोनिया गांधी से जुड़ा मामला?
शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल की थी। शिकायत में इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया और एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। अदालत के मौजूदा आदेश का मतलब आरोप साबित होना नहीं है। अदालत ने केवल निचली अदालत द्वारा शिकायत खारिज किए जाने के तरीके की समीक्षा करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेजा है।
मजिस्ट्रेट के आदेश में क्या कमी बताई गई?
सत्र अदालत ने पाया कि मजिस्ट्रेट का पिछला आदेश पर्याप्त कारणों के साथ नहीं था। विशेष न्यायाधीश ने इसे ‘नॉन-स्पीकिंग’ आदेश माना, यानी ऐसा आदेश जिसमें फैसले के पीछे पर्याप्त कारण स्पष्ट नहीं किए गए थे।
अदालत के मुताबिक मजिस्ट्रेट ने इस मूल सवाल पर पर्याप्त विचार नहीं किया कि शिकायत से कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है या नहीं। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस अधिकारी की दलीलें सुने बिना और पुलिस से स्थिति रिपोर्ट लिए बिना आदेश पारित किया गया था।
नागरिकता के सवाल पर भी कोर्ट की टिप्पणी
सत्र अदालत ने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट ने शिकायत में लगाए गए मुख्य आरोपों पर विचार करने के बजाय नागरिकता से जुड़े क्षेत्राधिकार के सवाल पर ज्यादा ध्यान दिया।
कोर्ट के मुताबिक शिकायत पर कानून के तहत उपलब्ध विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए था। इसमें एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देना या कानून के मुताबिक वैकल्पिक प्रक्रिया अपनाना शामिल हो सकता है। इसी आधार पर मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेजा गया है।
अब 29 सितंबर को क्या होगा?
मामला अब फिर मजिस्ट्रेट अदालत के सामने आएगा। वहां शिकायतकर्ता और पुलिस पक्ष को सुनने के बाद मामले पर कारण सहित नया आदेश पारित किया जाना है।
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई है या आरोप साबित हो गए हैं। सोमवार के आदेश से केवल पहले शिकायत खारिज करने वाला मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द हुआ है और कानूनी प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने का रास्ता खुला है।
29 सितंबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि मजिस्ट्रेट शिकायत पर आगे क्या आदेश देते हैं।



