Share Market Today: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों की बिकवाली हावी रही, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस कमजोरी का असर लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों पर देखने को मिला।
निवेशकों की चिंता क्यों बढ़ी?
विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उछाल से भारत जैसे तेल आयातक देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है।
इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार पर भारी पड़ रही है। विदेशी फंडों द्वारा भारतीय शेयरों में निवेश घटाने से बाजार में नकारात्मक माहौल बना हुआ है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर रही है।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा दबाव?
सुबह के कारोबार में बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, रियल एस्टेट और FMCG सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। कई बड़े बैंक और वित्तीय संस्थानों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार का दायरा और व्यापक हो गया।
बाजार के अधिकांश सेक्टर इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जो यह संकेत देता है कि बिकवाली केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे बाजार में दबाव बना रहा।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में आई इस तेज गिरावट का सीधा असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में लाखों करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। इससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और बाजार में सतर्कता का माहौल बन गया।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो बाजार पर दबाव जारी रह सकता है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट के बाद निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय बाजार की चाल और आर्थिक संकेतकों पर नजर रखनी चाहिए। फिलहाल निवेशकों की निगाहें वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और विदेशी फंडों की गतिविधियों पर टिकी हुई हैं।



