UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। चुनाव से पहले गठबंधन और सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल भी बढ़ने लगी है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सामने आ रहे बयानों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने प्रतिक्रिया दी है। राजभर ने 1995 के चर्चित गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में कुछ भी संभव है और यह तय नहीं कहा जा सकता कि भविष्य में कौन किसके साथ खड़ा होगा।
सीट बंटवारे को लेकर बढ़ी हलचल
दरअसल, 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग को लेकर अभी अंतिम तस्वीर साफ नहीं हुई है। कांग्रेस की ओर से उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने कहा है कि गठबंधन सहयोगियों के बीच सीट बंटवारे पर फैसला अक्टूबर में होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस गठबंधन के तहत 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। पार्टी के मुताबिक उसके पास प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार मौजूद हैं।
कांग्रेस का यह रुख ऐसे समय आया है, जब सपा और कांग्रेस दोनों ही अपने-अपने संगठन को चुनाव के लिए मजबूत करने में जुटे हैं। दोनों दल 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ चुके हैं और अब विधानसभा चुनाव को लेकर सीटों के बंटवारे पर सहमति बनाने की चुनौती सामने है।
राजभर ने याद दिलाया 1995 का गेस्ट हाउस कांड
सीट शेयरिंग को लेकर चल रही चर्चा पर ओपी राजभर ने पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उदाहरण दिया। उन्होंने 1995 के 2 जून गेस्ट हाउस कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सपा और बसपा के बीच संबंध बेहद खराब हो गए थे, लेकिन बाद के वर्षों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक समझ बनी।
राजभर ने इसी संदर्भ में कहा कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि उस समय किसने सोचा था कि सपा और बसपा के बीच फिर समझौता होगा। उनका कहना था कि राजनीतिक परिस्थितियां बदलती रहती हैं और यह पहले से तय नहीं किया जा सकता कि कौन कब किसके साथ आ जाए।
राजभर का यह बयान ऐसे समय आया है जब सपा और कांग्रेस के बीच सीटों की संख्या और चुनावी तालमेल को लेकर सार्वजनिक रूप से अलग-अलग संकेत सामने आ रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत और सीटों के अंतिम बंटवारे की तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।
कांग्रेस की 150 से अधिक सीटों की तैयारी
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 28 सितंबर को कहा कि पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत 150 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के पास सभी 403 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवार उपलब्ध हैं और पिछले कुछ समय से सीट बंटवारे की प्रक्रिया पर काम चल रहा है।
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया है कि संगठन को मजबूत करने के लिए प्रदेश में लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुनाव की तारीखों से पहले सीटों का बंटवारा स्पष्ट हो जाए तो संभावित उम्मीदवारों को अपने-अपने क्षेत्रों में तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
सपा-कांग्रेस के बीच अभी क्या स्थिति?
उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस दोनों ही INDIA गठबंधन के प्रमुख घटक हैं। दोनों पार्टियों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। हालांकि, 2027 विधानसभा चुनाव के लिए सीटों का फॉर्मूला अभी तय होना बाकी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर के अंत तक दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर औपचारिक प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी और सार्वजनिक बयानों के जरिए दोनों पक्ष अपने-अपने दावे सामने रख रहे थे।
ऐसे में कांग्रेस की 150 से कम सीटों पर चुनाव न लड़ने की घोषणा और सपा के साथ सीट शेयरिंग को लेकर जारी चर्चा आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल किसी अंतिम सीट बंटवारे की घोषणा नहीं हुई है। अक्टूबर में होने वाली बातचीत के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों दल किन सीटों पर किस फार्मूले के तहत चुनाव लड़ने पर सहमत होते हैं।
राजभर का बयान इसी बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच आया है। गेस्ट हाउस कांड का उदाहरण देकर उन्होंने यह संकेत दिया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में पुराने राजनीतिक विरोध के बावजूद समय के साथ समीकरण बदलते रहे हैं। हालांकि, मौजूदा सपा-कांग्रेस गठबंधन का भविष्य और सीट बंटवारे का अंतिम स्वरूप आने वाले दौर की बातचीत पर निर्भर करेगा।



