Election Commission Controversy: दिल्ली में बुधवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं की बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कई सवाल उठाए। बैठक में खरगे ने विपक्षी दलों की ओर से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा।
खरगे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक मतदाता के वोट का समान महत्व होना चाहिए। उन्होंने ‘एक व्यक्ति, एक वोट और एक समान मूल्य’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी योग्य मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया के सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।
SIR को लेकर खरगे ने जताई चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। खरगे ने इस संदर्भ में कर्नाटक के महादेवपुरा, अलंद के साथ-साथ हरियाणा और महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर उठे विवादों का भी जिक्र किया।
कांग्रेस की ओर से दावा किया गया है कि SIR के दौरान करीब 13.3 करोड़ नाम हटाए गए। हालांकि, इस आंकड़े और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग दावे और आपत्तियां हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ी मतदाता सेवाएं और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई गई है।
नाम हटाने से पहले सूचना देने की मांग
खरगे ने मांग रखी कि अगर किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाता है तो उसे इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। उनके मुताबिक संबंधित व्यक्ति को यह पता चलना चाहिए कि किस आधार पर उसका नाम हटाया गया और इसके खिलाफ अपील या शिकायत के लिए क्या प्रक्रिया उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी मांग की कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे पर्याप्त सूचना दी जाए और निर्णय के खिलाफ प्रभावी अपील का अवसर मिले। INDIA ब्लॉक की बैठक में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया गया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग
बैठक के दौरान खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों ने पिछले 10 महीनों में 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी आधार पर उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग दोहराई।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े और आरोप खरगे तथा कांग्रेस की ओर से रखे गए दावे हैं। चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर विपक्ष तथा आयोग के बीच सार्वजनिक तौर पर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति व्यवस्था पर भी सवाल
खरगे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने चयन प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश की भूमिका हटाए जाने और उनकी जगह केंद्रीय मंत्री को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई।
कांग्रेस अध्यक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान की स्वतंत्रता केवल वास्तविक रूप से ही नहीं, बल्कि जनता के बीच दिखाई भी देनी चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने चुनाव आयोग की नियुक्ति और संस्थागत जवाबदेही से जुड़े बदलावों पर चर्चा की।
पहली बार वोट देने वाले युवाओं पर भी जोर
बैठक में पहली बार मतदान करने वाले युवाओं के पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। खरगे ने कहा कि नए मतदाताओं के लिए वोटर के तौर पर पंजीकरण की प्रक्रिया सरल और सुलभ होनी चाहिए, ताकि पात्र युवा मतदान के अधिकार से वंचित न रहें।
विपक्षी दलों की ओर से मतदाता सूची में सुधार के साथ-साथ यह भी मांग रखी गई कि पात्र मतदाताओं के नाम किसी तकनीकी या प्रक्रियात्मक वजह से छूटने न पाए।
EVM की जगह बैलेट पेपर की मांग
मल्लिकार्जुन खरगे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी रखी। यह मांग INDIA ब्लॉक की बैठक में चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए गए प्रमुख मुद्दों में शामिल रही।
बैठक में विपक्षी दलों ने SIR से पहले की मतदाता सूची उपलब्ध कराने, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और नाम हटाने से पहले उचित प्रक्रिया अपनाने जैसी मांगों पर भी जोर दिया।
इस तरह INDIA ब्लॉक की बैठक में चुनाव आयोग, SIR, मतदाता सूची और EVM को लेकर विपक्ष की चिंताएं एक बार फिर सामने आईं। वहीं, चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े इन मुद्दों पर आगे भी राजनीतिक तथा संस्थागत स्तर पर बहस जारी रहने की संभावना है।



