Uttar Pradesh: Umesh Pal की पत्नी जया पाल की राजनीति में एंट्री, BJP ने बनाया OBC मोर्चा का प्रदेश मंत्री; जानें पूरा मामला

प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रहीं जया पाल को भाजपा ने उत्तर प्रदेश OBC मोर्चा की प्रदेश मंत्री बनाया है।

Uttar Pradesh: प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल हत्याकांड के बाद सुर्खियों में आईं उनकी पत्नी जया पाल को भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी है। भाजपा ने जया पाल को उत्तर प्रदेश ओबीसी मोर्चा की प्रदेश मंत्री नियुक्त किया है। पार्टी की ओर से गुरुवार को विभिन्न मोर्चों की प्रदेश टीम की घोषणा की गई, जिसमें जया पाल का नाम भी शामिल है।

जया पाल पिछले कुछ समय से भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों में सक्रिय नजर आ रही थीं। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी औपचारिक राजनीतिक भूमिका भी बढ़ गई है। जया पाल की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

जया पाल को मिली नई जिम्मेदारी

भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपने विभिन्न मोर्चों की नई टीम का ऐलान किया है। इसी क्रम में जया पाल को ओबीसी मोर्चा में प्रदेश मंत्री बनाया गया है। उनके साथ पूजा बिंद को भी प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। महिला मोर्चा में प्रयागराज निवासी और राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य अनीता सिंह को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है।

जया पाल के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह लंबे समय से सार्वजनिक रूप से उमेश पाल हत्याकांड और न्याय की लड़ाई से जुड़ी रही हैं। उनके पति उमेश पाल की हत्या के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

24 फरवरी 2023 को हुई थी उमेश पाल की हत्या

उमेश पाल की 24 फरवरी 2023 को प्रयागराज के धूमनगंज इलाके में उनके घर के बाहर गोली और बम से हमला कर हत्या कर दी गई थी। हमले में उनकी सुरक्षा में तैनात दो पुलिसकर्मी भी मारे गए थे। उमेश पाल वर्ष 2005 में हुई बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के मामले में प्रमुख गवाह थे।

इस हत्याकांड के बाद जया पाल की शिकायत पर धूमनगंज थाने में पूर्व सांसद अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता परवीन, बेटों और अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस जांच में अतीक के बेटे असद समेत कई अन्य लोगों के नाम भी सामने आए थे।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि उमेश पाल की हत्या के मामले में आरोप और जांच अलग-अलग स्तरों पर चली है। शुरुआती FIR में जया पाल ने अतीक अहमद, अशरफ और अन्य लोगों पर आरोप लगाए थे।

अतीक और अशरफ की भी हुई थी हत्या

उमेश पाल हत्याकांड की जांच के दौरान अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को पुलिस ने पूछताछ के लिए प्रयागराज लाया था। दोनों के खिलाफ उमेश पाल हत्या मामले में कानूनी कार्रवाई चल रही थी।

15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज के कॉल्विन अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाते समय अतीक अहमद और अशरफ की तीन हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस समय दोनों पुलिस हिरासत में थे। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल उठे थे।

अतीक अहमद और अशरफ की हत्या उमेश पाल हत्याकांड के करीब दो महीने बाद हुई थी। इससे पहले उमेश पाल की हत्या में उनकी भूमिका को लेकर पुलिस जांच चल रही थी और जया पाल की शिकायत पर दर्ज FIR में दोनों के नाम शामिल थे।

न्याय की लड़ाई को लेकर पहले भी चर्चा में रही हैं जया पाल

पति की हत्या के बाद जया पाल ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी। मार्च 2023 में उन्होंने कहा था कि वह अपने पति की लड़ाई को आगे बढ़ाएंगी और न्याय की मांग करती रहेंगी। उस समय उन्होंने उमेश पाल की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

इसके बाद भी जया पाल समय-समय पर उमेश पाल हत्याकांड को लेकर चर्चा में रही हैं। हाल ही में उन्हें सोशल मीडिया पर कथित धमकियां मिलने की खबर भी सामने आई थी, जिसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी।

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2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक भूमिका बढ़ी

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन में विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की प्रक्रिया तेज हुई है। जया पाल को ओबीसी मोर्चा की प्रदेश टीम में शामिल किया जाना इसी संगठनात्मक विस्तार का हिस्सा है।

प्रयागराज और आसपास के राजनीतिक हलकों में उनके भविष्य की चुनावी भूमिका को लेकर चर्चाएं जरूर हैं। कुछ रिपोर्टों में शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से उनकी संभावित दावेदारी की चर्चा की गई है, लेकिन फिलहाल इसे भाजपा की ओर से घोषित विधानसभा टिकट या आधिकारिक उम्मीदवारी नहीं माना जा सकता।

नई जिम्मेदारी के साथ जया पाल की भूमिका अब उमेश पाल हत्याकांड से जुड़े एक पीड़ित परिवार की सदस्य से आगे बढ़कर भाजपा के संगठनात्मक कामकाज तक पहुंच गई है। आने वाले समय में पार्टी उन्हें किस तरह की जिम्मेदारियां देती है और उनकी राजनीतिक सक्रियता किस दिशा में जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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