Emergency Healthcare: किसी सड़क हादसे या गंभीर मेडिकल इमरजेंसी के बाद मरीज को जल्द से जल्द इलाज मिलना बेहद जरूरी होता है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में कई स्तरों पर देरी हो सकती है—घटना की जानकारी मिलने से लेकर एंबुलेंस भेजने और अस्पताल को मरीज के पहुंचने की सूचना देने तक।
इसी समस्या को तकनीक के जरिए हल करने की कोशिश कर रहा है लखनऊ का हेल्थकेयर स्टार्टअप Hindcare Medtech। कंपनी का फोकस ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर है, जिसमें इमरजेंसी के दौरान मरीज से जुड़े जरूरी डेटा और अलर्ट संबंधित रिस्पॉन्स टीम, एंबुलेंस और अस्पताल तक तेजी से पहुंच सकें।
STPI के MedTech प्लेटफॉर्म पर Hindcare Medtech को उसके फाउंडर डॉ. आयुष सिंह के साथ सूचीबद्ध किया गया है। कंपनी एक ऐसे यूनिफाइड प्लेटफॉर्म पर काम कर रही है, जो अस्पतालों, एंबुलेंस, नर्सिंग होम, ब्लड बैंक और अन्य इमरजेंसी सेवाओं को जोड़ने की दिशा में है।
Lifedash से दुर्घटना की पहचान और अलर्ट
Hindcare Medtech की प्रमुख पहल Lifedash है। इसका उद्देश्य संभावित सड़क दुर्घटनाओं की पहचान करने और उसके बाद इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को सक्रिय करने में मदद करना है।
स्टार्टअप की परिकल्पना में दुर्घटना की सूचना केवल एक जगह तक सीमित नहीं रहती। इसके बजाय घटना से संबंधित जरूरी जानकारी को इमरजेंसी रिस्पॉन्डर, एंबुलेंस और अस्पताल तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है, ताकि मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले ही जरूरी तैयारियां शुरू की जा सकें।
गोल्डन ऑवर में कम हो सूचना की देरी
मेडिकल इमरजेंसी में गोल्डन ऑवर का महत्व इस बात से जुड़ा है कि मरीज को शुरुआती समय में कितनी तेजी से उचित चिकित्सा सहायता मिलती है। Hindcare Medtech इसी पूरी प्रक्रिया में सूचना और समन्वय की भूमिका को तकनीक से मजबूत करने पर जोर दे रहा है।
स्टार्टअप की सोच है कि दुर्घटना की पहचान से लेकर मरीज के अस्पताल पहुंचने तक अलग-अलग एजेंसियों के बीच कम से कम सूचना अंतराल रहे। इससे रिस्पॉन्स टीम को घटना के बारे में जल्दी जानकारी मिलने और अस्पताल को मरीज के लिए तैयारी करने में मदद मिल सकती है।
मरीज से अस्पताल तक एक कनेक्टेड सिस्टम
Hindcare Medtech के मॉडल में इमरजेंसी रिस्पॉन्स को अलग-अलग हिस्सों में देखने के बजाय उन्हें एक नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की गई है।
इसमें संभावित रूप से दुर्घटना की सूचना, इमरजेंसी रिस्पॉन्स, एंबुलेंस मूवमेंट और अस्पताल से जुड़ी जानकारी एक ही प्रक्रिया का हिस्सा बनती है। STPI के अनुसार Hindcare का यूनिफाइड प्लेटफॉर्म अस्पतालों, एंबुलेंस, नर्सिंग होम, ब्लड बैंक और यहां तक कि ड्रोन जैसी सेवाओं को जोड़ने की दिशा में विकसित किया जा रहा है।
यूपी का स्टार्टअप इकोसिस्टम भी दे रहा सहारा
Hindcare Medtech जैसी हेल्थटेक कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहा स्टार्टअप इकोसिस्टम भी महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 में इनक्यूबेशन, वित्तीय सहायता और डीप-टेक सहित विभिन्न उभरते क्षेत्रों को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है। नीति में यू-हब और 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना शामिल है।
स्टार्टअप मिशन के अनुसार नई नीति में हेल्थटेक और मेडटेक को भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। साथ ही शुरुआती चरण के स्टार्टअप के लिए निर्वाह भत्ता, प्रोटोटाइप ग्रांट और सीड कैपिटल जैसी सहायता का प्रावधान है।
SGPGI के इनक्यूबेशन इकोसिस्टम से जुड़ा स्टार्टअप
Hindcare Medtech को लखनऊ के SGPGI स्थित STPI MedTech Centre of Excellence से जुड़े स्टार्टअप के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका मकसद मेडिकल टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर के बीच ऐसी तकनीक को आगे बढ़ाना है, जिसे वास्तविक इमरजेंसी स्थितियों में इस्तेमाल किया जा सके।
उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप नीति में भी हेल्थटेक और मेडटेक को उभरते क्षेत्रों में शामिल किया गया है और CoE के जरिए ऐसे स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन, तकनीकी संसाधन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन देने की व्यवस्था पर जोर है।
मुख्यमंत्री योगी के सामने भी रखा गया विजन
स्टार्टअप के फाउंडर डॉ. आयुष सिंह हैं। टीम की ओर से हाल ही में गोरखपुर में आयोजित एक टेक्नोलॉजी/स्टार्टअप कार्यक्रम में अपनी तकनीक और इमरजेंसी हेल्थकेयर से जुड़े विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रस्तुत किया गया।
प्रस्तुति के दौरान इमरजेंसी की स्थिति में मरीज, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच तकनीकी कनेक्टिविटी को मजबूत करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
तकनीक से बदल सकता है इमरजेंसी रिस्पॉन्स का तरीका
Hindcare Medtech का फोकस केवल दुर्घटना का पता लगाने वाली तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है। स्टार्टअप एक ऐसे डिजिटल इमरजेंसी नेटवर्क की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें घटना की जानकारी से लेकर अस्पताल तक पहुंचने की प्रक्रिया में अलग-अलग सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सके।
अगर यह मॉडल बड़े स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होता है, तो इमरजेंसी के दौरान सूचना के प्रवाह, रिस्पॉन्स और अस्पताल की तैयारी को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी का यह मेल आने वाले समय में इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन सकता है



