S Jaishankar: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की विदेश नीति और प्रमुख देशों के साथ उसके संबंधों को लेकर अपनी बात रखी है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंध पहले की तरह किसी एक धुरी के इर्द-गिर्द नहीं घूम रहे हैं। देश अपने हितों के मुताबिक अलग-अलग साझेदारियों को आगे बढ़ा रहे हैं।
जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक बदलाव को बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ता कदम बताया। उनके मुताबिक, दुनिया में अब देश एक-दूसरे के साथ कई स्तरों पर समानांतर रूप से काम कर रहे हैं।
अमेरिका के पुराने नजरिए का भी किया जिक्र
विदेश मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान उस दौर का उल्लेख किया जब अमेरिका में यह सोच थी कि भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सीमित विकल्प रखने चाहिए और अमेरिका के साथ रिश्तों को अधिक प्राथमिकता देनी चाहिए।
जयशंकर के मुताबिक, परिस्थितियां अब बदल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज अमेरिका भी दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए हुए है। इसी बदलाव के कारण अंतरराष्ट्रीय राजनीति में देशों के बीच साझेदारियों का स्वरूप भी अधिक लचीला हुआ है।
‘हर देश अपने हितों के हिसाब से बढ़ा रहा रिश्ते’
जयशंकर की टिप्पणी का एक प्रमुख हिस्सा यह था कि मौजूदा दौर में देश किसी एक साझेदार पर निर्भर रहने के बजाय कई विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग देशों के साथ सहयोग संभव है। व्यापार, सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक और रणनीतिक मामलों में साझेदारियां एक जैसी नहीं होतीं। भारत भी इसी व्यापक अंतरराष्ट्रीय परिस्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए संबंधों को आगे बढ़ाता है।
भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार बना चुनौती
जयशंकर ने भारत और अमेरिका के रिश्तों पर बात करते हुए व्यापार और टैरिफ से जुड़े मुद्दों को भी रेखांकित किया। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है और अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव ने प्रक्रिया को और जटिल बनाया है।
भारत की ओर से वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल भी 29 सितंबर से 5 अक्टूबर तक अमेरिका के दौरे पर हैं। इस दौरान प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर बातचीत होनी है।
आतंकवाद पर भारत की चिंता का भी जिक्र
विदेश मंत्री ने भारत-अमेरिका संबंधों में आतंकवाद को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सीमा पार से होने वाला आतंकवाद लंबे समय से गंभीर चिंता का विषय रहा है और उसके साझेदारों से इस संवेदनशीलता को समझने की अपेक्षा रहती है।
जयशंकर के मुताबिक, जब किसी साझेदार देश की ओर से भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को पर्याप्त रूप से नहीं समझा जाता, तो इसका असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
बहुध्रुवीय दुनिया में बढ़ेंगे रणनीतिक विकल्प
जयशंकर ने बदलती वैश्विक व्यवस्था के संदर्भ में कहा कि आने वाले समय में देशों के लिए अपने विकल्प खुले रखना महत्वपूर्ण होगा। अलग-अलग शक्तियों और क्षेत्रों के साथ संबंध बनाए रखना देशों को बदलती परिस्थितियों से निपटने में मदद कर सकता है।
भारत लंबे समय से विभिन्न प्रमुख शक्तियों के साथ समानांतर संबंधों को आगे बढ़ाता रहा है। इसी संदर्भ में रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों के आधार पर विदेश नीति तय करने की बात भी सामने आती रही है।
भारत-चीन संबंधों में भी बदलाव का जिक्र
न्यूयॉर्क में जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मुद्दों में प्रगति के बाद दोनों देशों के संबंध पहले की तुलना में बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि, उन्होंने इसे किसी बुनियादी संरचनात्मक बदलाव के रूप में पेश नहीं किया।
इससे संकेत मिलता है कि भारत की विदेश नीति एक साथ कई मोर्चों पर संबंधों को संभालने की कोशिश कर रही है—अमेरिका के साथ व्यापार और रणनीतिक सहयोग, चीन के साथ सीमा एवं द्विपक्षीय संबंध और अन्य साझेदारों के साथ आर्थिक व सुरक्षा सहयोग।
वैश्विक व्यवस्था में भारत की भूमिका
जयशंकर की न्यूयॉर्क टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वैश्विक राजनीति में व्यापार, टैरिफ, ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
उनकी बातों का व्यापक संदेश यह रहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय माहौल में भारत अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार अलग-अलग देशों के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। बहुध्रुवीय होती दुनिया में यही नीति भारत के लिए अपने रणनीतिक और आर्थिक विकल्पों को बनाए रखने का आधार बन रही है।



