Share Market Crash; भारतीय शेयर बाजार में 8 अक्टूबर को कारोबार के दौरान भारी गिरावट देखने को मिली। सप्ताह के बीच बने दबाव के बाद गुरुवार को बिकवाली और तेज हो गई। इसका असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों के साथ निवेशकों की कुल संपत्ति पर भी पड़ा।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1,231.91 अंक यानी 1.69 प्रतिशत टूटकर 71,406.79 के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी 50 में 413.05 अंक यानी 1.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई और यह करीब 22,190 के स्तर पर आ गया।
एक दिन में 10.51 लाख करोड़ की संपत्ति कम
शेयर बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा असर BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैप पर दिखाई दिया। बुधवार को कारोबार खत्म होने पर इन कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4,72,35,273.39 करोड़ रुपये था।
गुरुवार की भारी बिकवाली के बाद यह आंकड़ा घटकर 4,61,83,659.33 करोड़ रुपये रह गया। इस तरह बाजार पूंजीकरण में 10,51,614.06 करोड़ रुपये, यानी करीब 10.52 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
सप्ताह की शुरुआत की तेजी नहीं टिक सकी
शेयर बाजार में इस सप्ताह की शुरुआत अपेक्षाकृत मजबूत रही थी। सोमवार को शुरुआती कारोबार में तेजी देखने को मिली थी और मंगलवार को भी बाजार में ज्यादा कमजोरी नहीं थी।
हालांकि, बुधवार से सेंटीमेंट बिगड़ने लगा और गुरुवार को इसका असर और ज्यादा साफ नजर आया। सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट के कारण निवेशकों के बीच बेचैनी बढ़ी।
रेपो रेट बढ़ने से बाजार पर दबाव
गिरावट के पीछे घरेलू स्तर पर रिजर्व बैंक का फैसला भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। RBI ने अपनी तीन दिवसीय बैठक के बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की।
ब्याज दर बढ़ने की स्थिति में कंपनियों के लिए कर्ज की लागत बढ़ने और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका रहती है। यही वजह है कि रेपो रेट में बदलाव का असर शेयर बाजार की धारणा पर भी दिखाई दिया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी भारतीय बाजार के लिए चिंता का कारण बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है।
तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये और महंगाई से जुड़े जोखिम बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है।
रुपये की कमजोरी से भी निवेशक चिंतित
भारतीय मुद्रा में कमजोरी ने भी बाजार के माहौल को प्रभावित किया। रुपये पर दबाव बढ़ने से आयात करने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा विदेशी निवेशकों के लिए भी मुद्रा से जुड़ा जोखिम बढ़ता है।
इन परिस्थितियों के बीच निवेशकों ने बाजार में जोखिम कम करने की कोशिश की, जिससे बिकवाली का दबाव और गहरा गया।
विदेशी निवेशकों की निकासी बनी बड़ी वजह
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी इस गिरावट के बीच चर्चा में रहीं। विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ने पर बाजार में उपलब्ध बिकवाली का दबाव और तेज हो जाता है।
घरेलू स्तर पर रेपो रेट और रुपये की कमजोरी के साथ वैश्विक संकेतों ने भी बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित किया। इसका नतीजा प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट के रूप में सामने आया।
अब निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर
गुरुवार की गिरावट के बाद बाजार की दिशा अब कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशक कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक बाजारों के रुख पर नजर रखेंगे।
साथ ही RBI के फैसले के बाद ब्याज दरों का असर कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर किस तरह दिखाई देता है, यह भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
8 अक्टूबर की गिरावट ने एक बार फिर दिखाया कि घरेलू और वैश्विक घटनाक्रम का असर भारतीय शेयर बाजार पर कितनी तेजी से पड़ सकता है। एक ही कारोबारी दिन में 10.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घटने ने निवेशकों के लिए यह दिन बेहद उतार-चढ़ाव वाला बना दिया।



