India US Partnership: PM मोदी-ट्रंप की बातचीत के बाद सर्जियो गोर का बयान, बोले- भारत के साथ कई क्षेत्रों में बढ़ रहा सहयोग

India US Partnership: अमेरिकी राजदूत ने भारत से जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति पर जताया भरोसा, रक्षा अभ्यास और दोनों देशों की कंपनियों के निवेश को बताया अहम

India US Partnership: भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को लेकर अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देश कई अहम क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवा और निवेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी से दोनों देशों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।

सोमवार, 12 अक्टूबर को कोलकाता में अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गोर ने द्विपक्षीय संबंधों पर अपनी बात रखी। उन्होंने भारतीय दवाओं की अमेरिकी बाजार में भूमिका, सैन्य सहयोग और दोनों देशों की कंपनियों के निवेश का भी जिक्र किया।

रक्षा से लेकर हेल्थकेयर तक सहयोग का दायरा

सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देश अलग-अलग क्षेत्रों में साझा प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चाहे रक्षा क्षेत्र हो या तकनीक और स्वास्थ्य सेवा, दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं।

उनके बयान के मुताबिक, द्विपक्षीय संबंध केवल सरकारी स्तर की बातचीत तक सीमित नहीं हैं। कंपनियों के निवेश, उत्पादन और विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त गतिविधियों के जरिए भी दोनों देशों के आर्थिक संबंध आगे बढ़ रहे हैं।

तरंग शक्ति अभ्यास का किया जिक्र

भारत-अमेरिका के सैन्य सहयोग पर बात करते हुए अमेरिकी राजदूत ने राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर हुए तरंग शक्ति सैन्य अभ्यास का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस अभ्यास में 500 से अधिक सैनिकों ने हिस्सा लिया था।

इस तरह के सैन्य अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के साथ समन्वय और संयुक्त संचालन का अनुभव मिलता है। रक्षा सहयोग भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

भारतीय दवाओं की आपूर्ति को बताया अहम

स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए गोर ने कहा कि अमेरिका भारत से बड़ी मात्रा में जेनेरिक दवाएं आयात करता है। उन्होंने इसके पीछे भारत पर भरोसे को महत्वपूर्ण बताया।

जेनेरिक दवाएं स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को नियंत्रित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। भारत का दवा उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन दवाओं की आपूर्ति करता है। ऐसे में भारतीय दवा कंपनियों और अमेरिकी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के बीच व्यापारिक संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत और अमेरिका में कंपनियां कर रहीं निवेश

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि कुछ अमेरिकी कंपनियां भारत में बड़े उत्पादन केंद्र स्थापित कर रही हैं। इसके साथ ही अमेरिका में भी निवेश किया जा रहा है।

गोर ने इस प्रक्रिया को दोनों देशों के लिए अवसर के रूप में पेश किया। उत्पादन केंद्रों की स्थापना और निवेश से औद्योगिक गतिविधियों, कारोबार तथा तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में किसी विशेष कंपनी या निवेश परियोजना का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया।

मोदी और ट्रंप की हालिया बातचीत पर क्या बोले?

गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले सप्ताह हुई बातचीत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं की बातचीत हो चुकी है और आगे क्या घटनाक्रम सामने आते हैं, इस पर नजर रखनी चाहिए।

उनकी टिप्पणी से दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संपर्क का संकेत मिलता है। हालांकि, इस बयान में बातचीत के विषयों, किसी संभावित समझौते या आगे होने वाली घोषणाओं की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।

आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी पर जोर

सर्जियो गोर के संबोधन में भारत-अमेरिका संबंधों के आर्थिक और रणनीतिक, दोनों पहलू सामने आए। एक ओर सैन्य अभ्यास और रक्षा सहयोग का जिक्र हुआ, तो दूसरी ओर दवा आपूर्ति, उत्पादन केंद्रों और कंपनियों के निवेश को महत्व दिया गया।

इन क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के बीच व्यापारिक और संस्थागत संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। भारत और अमेरिका के बीच आगे की साझेदारी किस दिशा में बढ़ती है, इस पर दोनों देशों की सरकारों और उद्योग जगत की गतिविधियों से संकेत मिलेंगे।

आगे की बातचीत पर टिकी नजरें

अमेरिकी राजदूत के बयान में भारत के साथ सहयोग जारी रखने और विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने पर जोर रहा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बातचीत का उल्लेख भी इसी संदर्भ में किया गया।

फिलहाल गोर ने किसी नए समझौते की घोषणा नहीं की, लेकिन उनके संबोधन ने रक्षा, स्वास्थ्य सेवा, तकनीक और निवेश को भारत-अमेरिका संबंधों के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में सामने रखा। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में होने वाली घोषणाएं और साझेदारियां द्विपक्षीय संबंधों की दिशा को स्पष्ट करेंगी।

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