Prashant Bhushan: प्रशांत भूषण के सत्ता परिवर्तन बयान पर कांग्रेस का समर्थन, सुखदेव भगत ने गांधीजी का दिया उदाहरण

Prashant Bhushan: सुखदेव भगत बोले- लोकतंत्र में विरोध करना हर नागरिक का अधिकार है।

Prashant Bhushan: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण की सत्ता परिवर्तन संबंधी टिप्पणी पर राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भूषण के बयान का बचाव करते हुए कहा कि सरकार के खिलाफ संवैधानिक तरीके से विरोध दर्ज कराना लोकतंत्र का हिस्सा है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता आंदोलनों का उदाहरण भी दिया।

लोहरदगा के कांग्रेस सांसद भगत ने कहा कि अंग्रेजों ने महात्मा गांधी के आंदोलनों के दौरान उन्हें गिरफ्तार किया और उनके आंदोलन को कानून के उल्लंघन के रूप में देखा। उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि किसी आंदोलन को लेकर सरकार की सोच और आंदोलनकारियों का नजरिया अलग-अलग हो सकता है।

गांधीजी के आंदोलनों से की मौजूदा विरोध की तुलना

सुखदेव भगत के अनुसार, जब भी कोई आंदोलन शुरू होता है, तो सरकार उसे अपने दृष्टिकोण से देखती है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वालों को सत्ता की ओर से कानून तोड़ने वाला माना जा सकता है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के सामने अपनी बात रखना भी नागरिकों का अधिकार है।

कांग्रेस सांसद ने स्पष्ट किया कि मौजूदा विरोध संवैधानिक और गांधीवादी तरीके से दर्ज कराया जा रहा है। उन्होंने प्रशांत भूषण की टिप्पणी का बचाव करते हुए आंदोलन और विरोध प्रदर्शन को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देखा।

प्रशांत भूषण ने सत्ता परिवर्तन को बताया था लोकतांत्रिक अधिकार

प्रशांत भूषण ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के बीच सत्ता परिवर्तन संबंधी बयान दिया था। ये प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR में कथित अनियमितताओं को लेकर किए जा रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके, छात्र संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ हुई प्रेसवार्ता में भूषण ने कहा था कि लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ असंतोष जाहिर करना अपराध नहीं है। उन्होंने सत्ता परिवर्तन की मांग को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी उठाए सवाल

प्रशांत भूषण ने कहा था कि सरकार विपक्ष पर सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगा रही है, जबकि उनके मुताबिक मौजूदा संघर्ष चुनावों को सही ढंग से कराने के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि कथित बर्बरता जारी रहती है, तो सत्ता परिवर्तन की मांग और तेज हो सकती है।

भूषण ने अपने बयान में भाजपा के पुराने आंदोलनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भाजपा ने भी सत्ता परिवर्तन के लिए आंदोलनों का नेतृत्व किया था, तो अब ऐसी मांग को साजिश के रूप में क्यों देखा जा रहा है।

SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी विरोध के बीच प्रशांत भूषण की टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने महात्मा गांधी के आंदोलनों का उदाहरण देकर इस बयान का बचाव किया। वहीं, भूषण ने चुनाव प्रक्रिया और सरकार के विरोध को लेकर अपनी बात रखी है।


Related Articles