Rajkumar Bhati Controversy: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में वह डॉ. भीमराव अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराते नजर आ रहे हैं। इन प्रतिज्ञाओं में भगवान राम और भगवान कृष्ण को भगवान न मानने तथा ब्रह्मा, विष्णु और महेश की पूजा नहीं करने की बात शामिल है। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी नेताओं ने सपा पर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने पर राजकुमार भाटी ने सफाई देते हुए कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और धर्म परिवर्तन करने का उनका कोई इरादा नहीं है।
दिल्ली के कार्यक्रम का है वायरल वीडियो
राजकुमार भाटी के मुताबिक, वह 20 अक्टूबर को दिल्ली के रानी झांसी मार्ग स्थित अंबेडकर भवन में भारतीय बौद्ध महासभा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में उन्हें मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था।
कार्यक्रम को ‘विशाल धम्म दीक्षा समारोह’ बताया गया है। इसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया गया। वायरल वीडियो में राजकुमार भाटी भी मंच पर मौजूद दिखाई देते हैं और प्रतिज्ञाएं लेते नजर आते हैं। इनमें हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं के अनुसार आचरण करने की बातें शामिल हैं।
इसी वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई। बीजेपी नेताओं ने इसे हिंदू आस्था से जोड़कर सवाल उठाए, जबकि भाटी ने अपने बयान में सभी धर्मों के प्रति सम्मान जताया।
राजकुमार भाटी ने क्या दी सफाई?
वीडियो पर विवाद बढ़ने के बाद राजकुमार भाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि एक समाजवादी होने के नाते वह हर धर्म, जाति, वर्ग और समुदाय का सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अलग-अलग समुदायों के निमंत्रण पर वह उनके धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे हैं।
भाटी के मुताबिक, वह सिख समुदाय के निमंत्रण पर गुरुद्वारे जाते हैं और गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेकते हैं। मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रमों में भी शामिल होते हैं और हिंदू धर्म के त्योहारों में हिस्सा लेते हैं। उन्होंने बौद्ध धर्म और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं के प्रति अपना विशेष आकर्षण भी व्यक्त किया।
धर्म परिवर्तन के आरोपों पर उन्होंने कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के विचारों और गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का समर्थन करने का अर्थ यह नहीं है कि उन्होंने अपना धर्म बदल लिया है। उनके मुताबिक, धर्म परिवर्तन करने की न तो उन्हें जरूरत है और न ही उनका ऐसा कोई इरादा है।
भाटी ने यह भी कहा कि किसी भी धर्म में रहते हुए मानवता की सेवा की जा सकती है और भेदभाव, छुआछूत, घृणा, अंधविश्वास तथा पाखंड के खिलाफ आवाज उठाई जा सकती है। उन्होंने अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर किए जा रहे प्रचार को गलत बताया।
बीजेपी नेता रोहन गुप्ता ने सपा पर उठाए सवाल
इस मामले पर बीजेपी नेता रोहन गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यक्रम का वीडियो साझा करते हुए समाजवादी पार्टी के नेतृत्व से सवाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के समय सपा हिंदू आस्था की बात करती है, जबकि उसके नेता धार्मिक मान्यताओं को लेकर अलग रुख दिखाते हैं।
रोहन गुप्ता ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से पूछा कि क्या राजकुमार भाटी का बयान पार्टी की विचारधारा को दर्शाता है। उन्होंने सपा पर दोहरे रवैये का आरोप भी लगाया।
बीजेपी की ओर से उठाए गए इन सवालों के बीच राजकुमार भाटी ने अपने बयान में सभी धर्मों के सम्मान और धार्मिक स्वतंत्रता की बात कही है। इस विवाद में दोनों पक्षों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन किसी एक नेता के बयान या कार्यक्रम में शामिल होने से पूरी पार्टी की विचारधारा के बारे में निष्कर्ष निकालना अलग विषय है।
क्या हैं अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं?
डॉ. भीमराव अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाएं बौद्ध धर्म अपनाने के दौरान उनके अनुयायियों द्वारा ली जाने वाली प्रतिज्ञाओं से जुड़ी हैं। इनमें हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने, ब्राह्मणों के हाथों धार्मिक कर्मकांड न कराने और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं के अनुसार जीवन जीने जैसी बातें शामिल हैं।
डॉ. अंबेडकर ने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म ग्रहण किया था। इन प्रतिज्ञाओं को उनके सामाजिक और धार्मिक विचारों के संदर्भ में देखा जाता है।
राजकुमार भाटी के वायरल वीडियो पर उठा विवाद भी इन्हीं प्रतिज्ञाओं को दोहराने से जुड़ा है। एक ओर बीजेपी नेता इसे हिंदू आस्था के अपमान के रूप में देख रहे हैं, वहीं भाटी ने इसे बौद्ध विचारों के प्रति सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए धर्म परिवर्तन की बात से इनकार किया है।
फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है। विवाद के बीच मुख्य सवाल यही है कि कार्यक्रम में ली गई प्रतिज्ञाओं को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल किस तरह अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।



