Anant Singh: बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की मांग पर शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ता नीरज कुमार ने शीर्ष अदालत से अनंत सिंह की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा जेल भेजने की मांग की है।
नीरज कुमार, दुलारचंद यादव के पोते हैं। उन्होंने हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में शीर्ष अदालत में यह तीसरी सुनवाई है। हालांकि, सुनवाई के बाद क्या फैसला आएगा, यह अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है मामला
मोकामा में 30 अक्टूबर 2025 को दुलारचंद यादव की मौत का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में अनंत सिंह को 1 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पटना की बेऊर जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद पटना हाईकोर्ट ने 19 मार्च 2026 को उन्हें जमानत दे दी थी। इसके बाद वह 23 मार्च को जेल से बाहर आ गए। अब इसी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
बिहार सरकार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किए जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है। इसमें अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास का उल्लेख करते हुए हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आर्म्स एक्ट समेत कुल 62 मामलों का हवाला दिया गया है। इन मामलों की मौजूदा कानूनी स्थिति अलग-अलग हो सकती है, इसलिए इन्हें दोषसिद्धि के समान नहीं माना जाना चाहिए।
JDU से निष्कासन के बाद भी चर्चा में अनंत सिंह
अनंत सिंह इन दिनों जनता दल यूनाइटेड (JDU) से टकराव के कारण भी सुर्खियों में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एमएलसी चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के विरोध और जनसुराज उम्मीदवार अनुज कुमार के समर्थन के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।
बताया गया है कि जेडीयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष आवेदन दिए जाने की बात भी सामने आई है।
इसके अलावा उनकी पत्नी नीलम देवी को भी छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनंत सिंह का राज्य मंत्री का दर्जा समाप्त कर दिया गया और वन पोलो रोड स्थित आवंटित आवास खाली करने के लिए नोटिस जारी किया गया।
इस प्रकार, अनंत सिंह के सामने कानूनी मामले के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियां भी हैं।
2005 में शुरू हुआ विधानसभा का सफर
‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह ने वर्ष 2005 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपने राजनीतिक सफर को आगे बढ़ाया। उसी वर्ष नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद 2010 में भी वह विधायक चुने गए।
नीतीश कुमार से मतभेद होने के बाद अनंत सिंह ने 2015 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा और जीत हासिल की। वर्ष 2020 में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के टिकट पर चुनाव जीता। इसके बाद 2025 में जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़कर फिर विधानसभा पहुंचे।
अनंत सिंह के जेल में रहने के दौरान उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई थी। इसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी ने उपचुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। मोकामा में अनंत सिंह और उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव लंबे समय से चर्चा में रहा है।
पुटुस यादव हत्याकांड के बाद जेल जाने का सिलसिला
अनंत सिंह की गिरफ्तारी का एक प्रमुख पुराना मामला वर्ष 2015 में पुटुस यादव की हत्या से जुड़ा था। रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2015 में गिरफ्तारी के बाद वह मार्च 2016 तक जेल में रहे। इसके बाद पटना हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी।
अगस्त 2019 में उनके पैतृक गांव लाडमा स्थित आवास से एके-47 राइफल, कारतूस और हैंड ग्रेनेड बरामद होने का मामला सामने आया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली की साकेत अदालत में आत्मसमर्पण किया था।
इस मामले में जून 2022 में उन्हें दस साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें इस मामले से बरी कर दिया। इसके बाद 16 अगस्त 2024 को वह जेल से बाहर आए।
नौरंगा-जालालपुर गोलीबारी मामले में भी हुई थी गिरफ्तारी
वर्ष 2025 में विधानसभा चुनाव से पहले मोकामा के नौरंगा-जालालपुर इलाके में हुई गोलीबारी के मामले में भी अनंत सिंह का नाम सामने आया था। इस प्रकरण में उन्होंने अदालत में आत्मसमर्पण किया और उन्हें बेऊर जेल भेजा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2025 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। इसके कुछ समय बाद दुलारचंद यादव की मौत से जुड़ा मामला सामने आया, जिसमें उनकी गिरफ्तारी हुई और अब जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
क्या अनंत सिंह को फिर जाना पड़ेगा जेल?
सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई का मुख्य मुद्दा अनंत सिंह को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका है। यदि अदालत जमानत रद्द करने का आदेश देती है, तो उन्हें दोबारा न्यायिक हिरासत में जाना पड़ सकता है। दूसरी ओर, आगे की स्थिति अदालत के आदेश और मामले की कानूनी प्रक्रिया से तय होगी।
फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि अनंत सिंह की गिरफ्तारी या जेल वापसी निश्चित है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा कि उनकी जमानत बरकरार रहती है या उसमें बदलाव होता है।



