Dengue Symptoms: डेंगू को अक्सर कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन ऐसा नहीं है। अच्छी सेहत और फिटनेस रखने वाले लोग भी डेंगू की चपेट में आ सकते हैं। मच्छर के काटने से फैलने वाला यह संक्रमण कुछ मामलों में गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए केवल फिट रहने को डेंगू से सुरक्षा की गारंटी नहीं मानना चाहिए।
डेंगू वायरस के चार प्रमुख प्रकार यानी सीरोटाइप होते हैं। किसी व्यक्ति को एक प्रकार का संक्रमण होने के बाद दूसरे प्रकार के वायरस से दोबारा संक्रमण हो सकता है। कुछ परिस्थितियों में दूसरी बार होने वाला संक्रमण गंभीर डेंगू का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में लक्षणों को समय पर पहचानना और जरूरी सावधानी बरतना बेहद महत्वपूर्ण है।
डेंगू के शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी
डेंगू होने पर शुरुआत में तेज बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कई बार मरीज को सामान्य वायरल बुखार जैसा महसूस होता है, लेकिन कुछ संकेत डेंगू की ओर इशारा कर सकते हैं।
इसके प्रमुख लक्षण हैं:
- अचानक तेज बुखार आना।
- सिरदर्द और आंखों के पीछे दर्द होना।
- मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द।
- जी मिचलाना या उल्टी होना।
- त्वचा पर लाल चकत्ते या रैशेज दिखाई देना।
- अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।
इनमें से कोई लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
बुखार उतरने के बाद भी हो सकता है खतरा
डेंगू में बुखार कम होना हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं होता। कुछ मरीजों में बुखार उतरने के आसपास या उसके बाद गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं। इस दौरान पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी और शरीर से खून निकलने जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेतों में शामिल हैं:
- पेट में तेज या लगातार दर्द।
- बार-बार उल्टी होना।
- नाक या मसूड़ों से खून आना।
- उल्टी या मल में खून दिखाई देना।
- बेचैनी या अत्यधिक सुस्ती।
- सांस लेने में परेशानी।
इनमें से कोई भी संकेत दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल में चिकित्सकीय सहायता लें। ऐसे मामलों में देरी करना खतरनाक हो सकता है।
दूसरी बार डेंगू होने पर क्यों बढ़ सकती है गंभीरता?
डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप होते हैं। किसी व्यक्ति को एक सीरोटाइप से संक्रमण होने के बाद उसके शरीर में उस प्रकार के वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा विकसित हो सकती है। लेकिन दूसरे सीरोटाइप से संक्रमण होने पर स्थिति अलग हो सकती है।
कुछ मामलों में दूसरी बार होने वाला डेंगू अधिक गंभीर हो सकता है। हालांकि, हर दूसरे संक्रमण में गंभीर बीमारी होगी, ऐसा जरूरी नहीं है। मरीज की स्थिति, संक्रमण का प्रकार और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियां भी इसमें भूमिका निभाती हैं।
इसलिए पहले डेंगू हो चुका हो, तब भी दोबारा बुखार आने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
डेंगू से बचने के लिए घर के आसपास न पनपने दें मच्छर
डेंगू से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचना और उनके प्रजनन को रोकना है। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर आमतौर पर दिन के समय भी काट सकता है। इसलिए सिर्फ रात में मच्छरदानी लगाना पर्याप्त नहीं है।
बचाव के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
- कूलर, गमले, बाल्टी और पानी की टंकियों को नियमित रूप से साफ करें।
- पानी के बर्तनों और टंकियों को ढककर रखें।
- पूरी बांह के कपड़े पहनें, ताकि शरीर का अधिक हिस्सा ढका रहे।
- जरूरत के अनुसार मच्छर भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- खिड़कियों और दरवाजों पर मच्छर रोकने वाली जाली लगवाएं।
- घर के आसपास जमा कचरे और पानी की नियमित सफाई करें।
डेंगू के लक्षण दिखें तो खुद से दवा न लें
बुखार या शरीर में दर्द होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं लेना उचित नहीं है। डेंगू की आशंका होने पर चिकित्सक से जांच और इलाज के बारे में सलाह लें। पर्याप्त तरल पदार्थ लेना और डॉक्टर की बताई सलाह का पालन करना जरूरी है।
डेंगू के गंभीर संकेत दिखाई देने पर घर पर इंतजार न करें। समय पर अस्पताल पहुंचने से जटिलताओं का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
सतर्कता और समय पर इलाज है जरूरी
डेंगू किसी भी उम्र और फिटनेस स्तर के व्यक्ति को हो सकता है। इसलिए अच्छी सेहत होने के बावजूद मच्छरों से बचाव जरूरी है। शुरुआती लक्षणों को पहचानना, बुखार के दौरान चिकित्सकीय सलाह लेना और बुखार उतरने के बाद भी चेतावनी संकेतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है।
घर और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना और गंभीर लक्षणों पर तुरंत अस्पताल जाना डेंगू से बचाव और जोखिम कम करने में मदद कर सकता है।



