सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद एक ढांचे पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, AIMIM और बसपा समेत विपक्ष के कई दलों ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की है।
‘यह ध्वस्तीकरण का आदेश था ही नहीं’ — इमरान मसूद का दावा
इमरान मसूद ने कहा कि जिस आदेश के तहत यह कार्रवाई अंजाम दी गई, वह असल में सिर्फ बेदखली से जुड़ा था, जिसमें अभी 22 दिन की मियाद बाकी थी। उनके मुताबिक इस समयसीमा को नजरअंदाज करते हुए पूरे परिसर को एक ही दिन में खाली करा दिया गया। उनका कहना था कि इससे केवल एक ढांचा नहीं टूटा, बल्कि इस घटना ने समुदाय को भावनात्मक रूप से भी गहरी चोट पहुंचाई है।
‘न्याय के दरवाजे बंद किए जा रहे हैं’ — सांसद की नाराजगी
आगे बात करते हुए इमरान मसूद ने इसे न्यायिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताया। उनका तर्क था कि किसी भी निर्माण को गिराने से पहले न्यूनतम 15 दिन की मोहलत देने की व्यवस्था खुद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट अपने पुराने आदेशों में स्पष्ट कर चुके हैं, लेकिन इस मामले में उस प्रक्रिया की अनदेखी की गई। उन्होंने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए गंभीर सवाल खड़े किए।
ओवैसी बोले — ‘सिर्फ चुनावी फायदे के लिए हो रही कार्रवाई’
इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे पर तीखा रुख अपनाया था। उनका आरोप था कि सत्तापक्ष धार्मिक स्थलों को निशाना बनाकर सिर्फ चुनावी लाभ लेने की कोशिश में जुटा है। उन्होंने दावा किया कि जिस स्थान की बात हो रही है, वहां धार्मिक ढांचा प्रशासनिक भवन बनने से भी काफी पहले से मौजूद था, और इस पूरी कार्रवाई के पीछे सांप्रदायिक मानसिकता काम कर रही है।
अखिलेश यादव का पलटवार — ‘सद्भाव होनी चाहिए पहली प्राथमिकता’
समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मसले पर अपनी राय रखते हुए कहा कि जो लोग दूसरे धर्मों की भावनाओं की कद्र नहीं करते, वे खुद को सच्चा सनातनी नहीं कह सकते। उनका मानना था कि किसी भी सरकार को सबसे ज्यादा तवज्जो सामाजिक सद्भाव को देनी चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर मामले को ऊपरी अदालतों तक ले जाने का मौका दिए बगैर इतनी हड़बड़ी में फैसला क्यों लिया गया।
सहारनपुर में हुई इस कार्रवाई पर विपक्षी खेमे से लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इमरान मसूद, ओवैसी और अखिलेश यादव के बयानों ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की सियासत में और गरमा सकता है।



