CM Rekha Gupta: दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने की घटना ने एक बार फिर राजधानी में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सोमवार को दोबारा मौके पर पहुंचीं। उन्होंने घटनास्थल की स्थिति देखी और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली।
मौके पर मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया कि अगर किसी अधिकारी की लापरवाही या अनदेखी इस हादसे से जुड़ी पाई गई तो उसके खिलाफ कार्रवाई में देरी नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा।
हादसे की वजह को लेकर CM ने क्या बताया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ वह काफी पुरानी थी। बेसमेंट में पानी जमा होने के कारण बिल्डिंग के स्ट्रक्चर पर असर पड़ा और पिलर कमजोर होने के बाद पूरी इमारत ढह गई।
सीएम ने यह भी कहा कि सिर्फ हादसे वाली इमारत तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। आसपास मौजूद ऐसी इमारतों की भी जांच की जाएगी, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज से खतरा माना जा रहा है।
पीछे वाली बिल्डिंग भी कराई गई खाली
मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे वाली इमारत के ठीक पीछे मौजूद एक अन्य बिल्डिंग को खाली करा लिया गया है। प्रशासन अब उसे भी गिराने की तैयारी कर रहा है।
सरकार का फोकस फिलहाल इस बात पर है कि आसपास की किसी दूसरी इमारत में भी ऐसी स्थिति न बने, जिससे लोगों की जान खतरे में पड़े।
मलबे में 12 लोग मिले, 6 की मौत
रेखा गुप्ता ने बताया कि घटनास्थल से करीब 80 फीसदी मलबा हटाया जा चुका है। अब तक 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है। इनमें 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 लोग घायल बताए गए हैं।
हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति मलबे में तो नहीं फंसा है।
अधिकारियों पर आज ही हो सकती है कार्रवाई
हादसे को लेकर मुख्यमंत्री का सबसे बड़ा बयान अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर आया। उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने अपने स्तर पर लापरवाही बरती या मामले को नजरअंदाज किया, उनके खिलाफ उसी दिन कार्रवाई की जाएगी।
सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच के बाद जिम्मेदार लोगों को किसी भी कीमत पर बचाया नहीं जाएगा।
PG और स्कूल जैसी इमारतों के लिए नई व्यवस्था
हादसे के बाद सरकार अब दिल्ली की उन इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी नई व्यवस्था बनाने की तैयारी में है, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते या आते-जाते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार नगर निगम के साथ मिलकर ऐसी नीति पर काम कर रही है, जिसमें PG, स्कूल, नर्सिंग होम और दूसरी सार्वजनिक गतिविधियों वाली इमारतों का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी इमारत को सुरक्षित घोषित किए जाने से पहले उसकी स्थिति की उचित जांच हो।
पीड़ित परिवारों के संपर्क में सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे में प्रभावित लोगों के परिवारों से सरकार लगातार संपर्क में है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवारों को जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकार की ओर से राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ प्रभावित परिवारों की मदद पर भी नजर रखी जा रही है।
मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कही कार्रवाई की बात
दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही है। उन्होंने संकेत दिया कि कमांड चेन में जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
सिरसा के मुताबिक, यह पता लगाने की कोशिश भी जारी है कि कहीं कोई मजदूर अभी भी घटनास्थल पर फंसा तो नहीं है।
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अब जांच के नतीजों पर नजर
सत्य निकेतन हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी पुरानी इमारत की सुरक्षा को लेकर पहले क्या जांच हुई थी और अगर किसी स्तर पर लापरवाही हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
मुख्यमंत्री के सख्त बयान के बाद अब सबकी नजर जांच और प्रस्तावित कार्रवाई पर है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और दिल्ली में असुरक्षित इमारतों को लेकर सरकार क्या नई व्यवस्था लागू करती है।



