International News: BRICS आज दुनिया के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूहों में शामिल है। भारत, चीन, रूस समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं इस समूह का हिस्सा हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि BRICS की शुरुआत आज के 11 देशों के समूह के तौर पर नहीं हुई थी? इसकी कहानी सिर्फ चार देशों से शुरू हुई थी और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया।
2001 में हुई BRIC शब्द की शुरुआत
BRIC शब्द का इस्तेमाल पहली बार 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ’नील ने किया था। उन्होंने ब्राजील, रूस, भारत और चीन जैसी तेजी से बढ़ती उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए BRIC शब्द का इस्तेमाल किया।
BRIC में B का मतलब Brazil, R का Russia, I का India और C का China था। उस समय यह कोई औपचारिक अंतरराष्ट्रीय संगठन नहीं था, बल्कि इन चार अर्थव्यवस्थाओं को एक समूह के तौर पर देखने की अवधारणा थी।
2009 में पहला BRIC शिखर सम्मेलन
BRIC देशों के बीच औपचारिक सहयोग की दिशा में 2006 में कदम बढ़ा, जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान चारों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक हुई। इसके बाद 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया।
इस बैठक के साथ चारों देशों के बीच सहयोग शीर्ष नेतृत्व के स्तर तक पहुंचा। समूह का उद्देश्य वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की भूमिका को मजबूत करना था।
दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से बना BRICS
2010 में दक्षिण अफ्रीका को समूह में शामिल करने पर सहमति बनी और 2011 में उसने चीन के सान्या में आयोजित BRIC शिखर सम्मेलन में पहली बार हिस्सा लिया। इसके साथ ही BRIC का नाम बदलकर BRICS हो गया।
इसके बाद समूह का लगातार विस्तार हुआ। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इसके सदस्य बने। 2025 में इंडोनेशिया के शामिल होने के बाद सदस्य देशों की संख्या 11 हो गई।
वर्तमान में BRICS में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया शामिल हैं।
BRICS में पार्टनर देशों की भी भूमिका
BRICS के पूर्ण सदस्य देशों के अलावा कई पार्टनर देश भी समूह से जुड़े हैं। इनमें बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम शामिल हैं।
पूर्ण सदस्य देशों को समूह के निर्णयों और गतिविधियों में अधिक व्यापक भूमिका हासिल होती है, जबकि पार्टनर देश सहयोग के लिए जुड़े होते हैं और उन्हें विभिन्न बैठकों में आमंत्रित किया जा सकता है।
BRICS का बढ़ता विस्तार इसे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मंच पर एक महत्वपूर्ण समूह बनाता जा रहा है। भारत समेत सदस्य देश आर्थिक सहयोग, विकास और वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर इस मंच का इस्तेमाल करते हैं।



