Cooking Oil Price: त्योहारों से पहले मिल सकती है राहत, खाने के तेल पर ड्यूटी घटाने की तैयारी

Cooking Oil Price: खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार आयात शुल्क घटाने पर कर रही विचार, त्योहारों से पहले मिल सकती है राहत।

Cooking Oil Price: देशभर में रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। दाल, सब्जियों और अन्य जरूरी खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ खाने के तेल की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले एक साल के दौरान कई प्रमुख खाद्य तेलों के दाम करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ा है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क में कटौती जैसे विकल्पों पर विचार कर रही है।

आयात पर काफी हद तक निर्भर है भारत

भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल उपभोक्ताओं में शामिल है। हालांकि घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। यही वजह है कि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। पाम ऑयल, सोयाबीन ऑयल और सूरजमुखी तेल जैसी प्रमुख किस्में मलेशिया, इंडोनेशिया, अर्जेंटीना, रूस और यूक्रेन समेत कई देशों से आयात की जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव भारतीय बाजार को भी सीधे प्रभावित करता है।

वैश्विक हालात का भी पड़ रहा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ समय में वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा है। कई देशों में मौसम संबंधी चुनौतियों, उत्पादन में कमी और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण खाद्य तेलों की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इसका असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ा, जिसका बोझ भारतीय उपभोक्ताओं को भी उठाना पड़ रहा है।

कितना घट सकता है आयात शुल्क?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार खाद्य तेलों पर लगने वाली बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी में करीब 5 प्रतिशत तक कटौती करने पर विचार कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकार विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के बाद अंतिम फैसला ले सकती है।

क्या उपभोक्ताओं को तुरंत मिलेगी राहत?

विशेषज्ञों का कहना है कि आयात शुल्क में कमी का असर बाजार में धीरे-धीरे दिखाई देगा। केवल टैक्स घटाने से कीमतों में तुरंत बड़ी गिरावट आना तय नहीं माना जा सकता। यदि वैश्विक बाजार में कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो राहत सीमित हो सकती है। फिर भी यह कदम कीमतों पर दबाव कम करने और बाजार को स्थिर रखने में मददगार साबित हो सकता है।

किसानों के हितों का भी रखा जाएगा ध्यान

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपभोक्ताओं और किसानों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखने की है। यदि आयातित तेल बहुत सस्ता हो जाता है, तो घरेलू तिलहन उत्पादकों को नुकसान हो सकता है। इसलिए सरकार ऐसा समाधान तलाश रही है जिससे एक ओर आम लोगों को राहत मिले और दूसरी ओर किसानों की आय पर नकारात्मक असर न पड़े।

त्योहारों से पहले अहम फैसला संभव

सितंबर से नवंबर तक देश में त्योहारों का सीजन रहता है। इस दौरान मिठाइयों, स्नैक्स और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण खाने के तेल की खपत भी बढ़ जाती है। ऐसे में सरकार कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए जल्द कोई बड़ा फैसला ले सकती है। यदि आयात शुल्क में कटौती होती है, तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।

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