Saharanpur News: सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के पास ध्वस्त की गई मस्जिद का मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है। समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित पक्ष अदालत में अपनी बात मजबूती से रख रहा है और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है। उन्होंने लोगों से संयम बनाए रखने की अपील भी की।
पीडीए कार्यक्रम में उठाया मुद्दा
सहारनपुर में आयोजित पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) कार्यक्रम के दौरान इकरा हसन ने मस्जिद विवाद का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों को बेहद संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ संभाला जाना चाहिए। उनके मुताबिक किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर उठाए गए कदमों का असर समाज के विभिन्न वर्गों पर पड़ता है, इसलिए ऐसे मामलों में संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है।
सहारनपुर के लोगों की शांति की सराहना
इकरा हसन ने कहा कि मस्जिद को लेकर विवाद के बावजूद सहारनपुर के लोगों ने धैर्य और समझदारी का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि शहर लंबे समय से आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की मिसाल रहा है। उनके अनुसार स्थानीय नागरिकों ने किसी भी तरह की उकसावे वाली स्थिति से बचते हुए शांति बनाए रखी, जिससे माहौल सामान्य बना रहा।
कानूनी प्रक्रिया पर जताया भरोसा
सपा सांसद ने कहा कि मस्जिद से जुड़े दस्तावेज और अन्य कानूनी पहलू अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं। उन्होंने समर्थकों और स्थानीय लोगों से अपील की कि वे कानून पर भरोसा रखें और किसी भी तरह की अफवाहों से दूर रहें। उनका कहना था कि मामले का अंतिम समाधान न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही निकलेगा और सभी पक्षों को अदालत के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल
इकरा हसन ने यह भी कहा कि मस्जिद को हटाने की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि संबंधित पक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। हालांकि प्रशासन की ओर से इस कार्रवाई को अदालत के आदेश के अनुरूप बताया गया है। ऐसे में मामला अब पूरी तरह कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में है।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, हाल ही में जिला अदालत के आदेश के बाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट क्षेत्र में स्थित एक मस्जिद को प्रशासन द्वारा हटाया गया था। मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक उपयोग में था और संबंधित जमीन वक्फ संपत्ति का हिस्सा है। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत की गई। इसी वजह से यह मामला अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी विषय बन गया है।
आगे क्या?
फिलहाल सभी की नजरें अदालत की अगली सुनवाई और उससे जुड़े फैसलों पर टिकी हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे और दस्तावेज अदालत के सामने रख रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में नए घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।



