Related Articles

November 4, 2026
1
Supreme Court: दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- अब नहीं रही प्रासंगिकता

November 4, 2026
1
Digital Payment: भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने पिछले कुछ वर्षों में तेज रफ्तार पकड़ी है। आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक UPI के जरिए भुगतान आम बात बन चुकी है। इसके बावजूद नकदी की मांग में कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिल रही है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 के अंत तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी बढ़कर 42.86 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.5 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल और नकद भुगतान एक-दूसरे के विकल्प जरूर हैं, लेकिन दोनों की अपनी अलग भूमिका है। कई लोग दैनिक जरूरतों के लिए UPI का उपयोग करते हैं, जबकि बचत, आपातकालीन जरूरतों या स्थानीय लेनदेन के लिए नकदी रखना पसंद करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कारोबारों और बुजुर्ग आबादी के बीच आज भी कैश का इस्तेमाल व्यापक रूप से जारी है। यही वजह है कि डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद नकदी की मांग बनी हुई है।
कैश सर्कुलेशन बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि लोग डिजिटल भुगतान से दूरी बना रहे हैं। अगस्त महीने में UPI लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 22.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कुल लेनदेन मूल्य भी करीब 20 प्रतिशत बढ़ा है।
इससे साफ है कि देश में डिजिटल और नकद दोनों तरह के भुगतान समानांतर रूप से बढ़ रहे हैं।
हाल के दिनों में बड़े UPI मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर MDR लागू किए जाने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा तेज हुई है। माना जा रहा है कि यदि बड़े भुगतान पर अतिरिक्त लागत आती है, तो कुछ व्यापारी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
हालांकि इस विषय पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है, लेकिन वित्तीय क्षेत्र में इसे लेकर लगातार बहस जारी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी बड़ी और विविध अर्थव्यवस्था में डिजिटल भुगतान और नकदी दोनों की जरूरत बनी रहेगी। जहां UPI लेनदेन को आसान और तेज बना रहा है, वहीं नकदी अभी भी करोड़ों लोगों के लिए भरोसेमंद भुगतान माध्यम बनी हुई है। आने वाले वर्षों में भी दोनों प्रणालियां साथ-साथ आगे बढ़ती दिखाई दे सकती हैं।

